Navratri Special : नरसिंहपुर | राहुल पाटकर : नरसिंहपुर की शांत और हरी-भरी श्रीवनम की पहाड़ियों के बीच राजराजेश्वरी त्रिपुर सुंदरी का दिव्य दरबार सजा हुआ है। नवरात्र के पावन अवसर पर यहाँ का माहौल आध्यात्म और भक्ति से ओत-प्रोत हो जाता है। यह धाम देश भर में अपनी अद्वितीय विशिष्टता के लिए जाना जाता है, क्योंकि ऐसा माना जाता है कि यह देश का इकलौता ऐसा स्थल है जहाँ माँ भगवती का इतना भव्य और शक्तिशाली स्वरूप एक साथ विराजित है।
Navratri Special : इस मंदिर की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यहाँ सौंदर्य और शक्ति की देवी माँ त्रिपुर सुंदरी अपने पूर्ण षोडशी स्वरूप में, अपनी सेना, चौसठ योगिनियों और तिथियों की देवी माँ नित्याओं के साथ एक ही परिसर में विराजमान हैं। माँ का यह स्वरूप भक्तों को भोग (सांसारिक सुख) और मोक्ष दोनों साथ-साथ प्रदान करने वाला माना जाता है, जबकि चौसठ योगिनी माँ की शक्ति का और नित्या देवी तिथियों का प्रतिनिधित्व करती हैं।
यह पवित्र स्थल ब्रह्मलीन शंकराचार्य स्वरूपानंद सरस्वती की तप स्थली झोंतेश्वर में स्थित है, जिन्होंने इसे ‘पाँचवें धाम’ का नाम दिया था। मंदिर का इतिहास भी असाधारण है। माँ त्रिपुर सुंदरी की प्राण-प्रतिष्ठा वर्ष 1983 में चारों शंकराचार्यों के पावन सान्निध्य और मार्गदर्शन में संपन्न हुई थी, जो इस धाम की महत्ता को और भी अधिक बढ़ा देता है। प्राकृतिक खूबसूरती के साथ यहाँ का माहौल अध्यात्म और तीव्र ऊर्जा से भरा हुआ है। दूर-दूर से श्रद्धालु विशेष रूप से नवरात्रि में इस अद्वितीय शक्ति धाम में माँ के दर्शन और वंदना करने पहुँच रहे हैं।











