नई दिल्ली। दिल्ली हाईकोर्ट ने रूपा पब्लिकेशंस को भारतीय संविधान के पॉकेट साइज़ संस्करण का प्रकाशन और बिक्री रोकने का आदेश दिया है। यह फैसला ईस्टर्न बुक कंपनी (EBC) की याचिका पर आया है। कोर्ट ने रूपा पब्लिकेशंस पर यह भी निर्देश दिया कि बचे हुए स्टॉक और ऑनलाइन लिस्टिंग को हटाया जाए।
कोर्ट का फैसला और कारण
हाई कोर्ट की एकल जज बेंच ने माना कि रूपा पब्लिकेशंस ने EBC के लाल-काले कवर डिजाइन और विशेषताओं की नकल की है। कोर्ट ने कहा कि सामान्य उपभोक्ता दोनों पुस्तकों की ट्रेड ड्रेस (रंग, डिजाइन, लेआउट) एक जैसी समझ सकता है, जिससे भ्रम पैदा होता है।
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EBC का दावा
EBC ने बताया कि वे 2009 से लाल-काले रंग, स्पेशल फॉन्ट, गोल्ड लीफिंग और पतले कागज वाले संस्करण छाप रहे हैं, जो वकीलों, जजों, नेताओं और आम जनता में लोकप्रिय हैं। EBC ने कहा कि रूपा के सस्ते संस्करण की वजह से सितंबर 2025 में उन्हें 18,000 कॉपीज के ऑर्डर में नुकसान हुआ।
कानूनी दृष्टिकोण
कोर्ट ने अपने फैसले में ‘कोलगेट बनाम ऐंकर’ जैसे पूर्व मामलों का हवाला दिया। कोर्ट ने कहा कि भले ही कोई एक रंग पर अधिकार नहीं रख सकता, लेकिन लंबे समय से इस्तेमाल किए जा रहे स्पेशल रंग कॉम्बिनेशन और डिजाइन की कानूनी सुरक्षा होती है।
आदेश का असर
रूपा पब्लिकेशंस को निर्देश दिया गया कि वे इस डिजाइन का इस्तेमाल बंद करें, बिक्री रोकें, और बचे हुए स्टॉक तथा ऑनलाइन लिस्टिंग हटा दें। कोर्ट ने पाया कि रूपा का संस्करण EBC के पहले से प्रकाशित लाल-काले संस्करण से काफी मिलता-जुलता था।
पूर्व उदाहरण
विभिन्न कोर्ट्स ने इसी तरह के आदेश यंग ग्लोबल पब्लिकेशन्स और प्रोफेशनल बुक पब्लिशर्स के खिलाफ भी दिए हैं। इस फैसले से कॉपीराइट और ट्रेड ड्रेस सुरक्षा के मामले में मानक स्थापित होंगे।











