बालोद। छत्तीसगढ़ के डौंडीलोहारा नगर पंचायत में उपाध्यक्ष और पार्षदों की नाराज़गी बढ़ती जा रही है। उपाध्यक्ष ने आरोप लगाया है कि परिषद की बैठकें अध्यक्ष की मनमर्जी पर निर्भर हैं। एजेंडा की जानकारी उपाध्यक्ष को नहीं दी जाती और किसी प्रकार का परामर्श भी नहीं होता।
पार्षद राजेंद्र निषाद का कहना है कि इस स्थिति के कारण अधिकारी और कर्मचारी अपनी मर्जी से काम कर रहे हैं। विकास कार्य ठप हैं और जनता परेशान हो रही है। वहीं, किशोर दीवान सहित कई पार्षद भी बैठक न होने से उत्पन्न समस्या को गंभीर मानते हैं।
नगर पंचायत अध्यक्ष के समर्थक बताते हैं कि अध्यक्ष रायपुर जाकर नगर की समस्याओं को उठाते हैं और मुख्यमंत्री के कार्यालय तक मुद्दे पहुँचाते हैं। इसे उनकी सक्रियता के रूप में देखा जाता है। लेकिन विपक्षी पार्षदों का सवाल है कि परिषद का काम केवल अध्यक्ष की यात्राओं पर निर्भर नहीं होना चाहिए।
स्थानीय स्तर पर बैठकें लगातार न होने के कारण विकास कार्यों में बाधा आ रही है। जनता को मिलने वाली सुविधाएं और राहत भी प्रभावित हो रही है। पार्षदों का कहना है कि जल्द बैठकें आयोजित की जाएं ताकि जनहित के मुद्दों को समय पर हल किया जा सके।









