रीवा, 08 सितंबर 2025 : श्यामशाह चिकित्सा महाविद्यालय, रीवा में 25 अगस्त से चल रहा नेत्रदान पखवाड़ा आज समापन पर पहुंचा। इस पखवाड़े का मुख्य उद्देश्य लोगों को नेत्रदान के महत्व से अवगत कराना और इसके प्रति समाज में फैली भ्रांतियों को दूर करना रहा।
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समापन कार्यक्रम में मेडिकल कॉलेज के अधीक्षक डॉ. राहुल मिश्रा, डीन सुनील अग्रवाल, नेत्र विभाग के एचओडी डॉ. शशि जैन सहित छात्र-छात्राएं और चिकित्सा महाविद्यालय का स्टाफ मौजूद रहा। इस दौरान नेत्रदान को “महादान” बताते हुए कहा गया कि इससे नेत्रहीन व्यक्ति के जीवन में नई रोशनी लाई जा सकती है।
नेत्र विभागाध्यक्ष डॉ. शशि जैन ने स्पष्ट किया कि नेत्रदान के दौरान पूरी आँख नहीं निकाली जाती, बल्कि सिर्फ़ कॉर्निया (सामने की पारदर्शी परत) ली जाती है। उन्होंने यह भी बताया कि दान किए गए नेत्र अगले जन्म में अंधापन का कारण नहीं बनते, यह मात्र एक भ्रम है।
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6 घंटे के भीतर जरूरी प्रक्रिया
डॉ. जैन ने कहा कि नेत्रदान प्रक्रिया मृत्यु के छह घंटे के भीतर पूरी की जानी चाहिए, तभी यह कारगर साबित होती है। दान किए गए नेत्रों को आई बैंक में कई हफ्तों तक सुरक्षित रखा जा सकता है और जरूरत पड़ने पर नेत्रहीन मरीजों को प्रत्यारोपित किया जा सकता है।
नेत्र विभाग की ओर से लोगों से अपील की गई कि वे इस महान कार्य में आगे आएं और नेत्रदान के लिए समाज को प्रेरित करें।
















