Monday, February 16, 2026
28.1 C
Raipur

Kanker News : 20 गांवों में पादरियों का प्रवेश बैन, जानें पूरा मामला….

Kanker News : कांकेर, छत्तीसगढ़ : छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले में धर्मांतरण के बढ़ते मामलों ने एक नया मोड़ ले लिया है। जिले के सुलगी गांव में 20 गांवों के समाज प्रमुखों ने एक बड़ी बैठक की, जिसमें सर्वसम्मति से ईसाई पास्टर और पादरियों का गांव में प्रवेश वर्जित करने का फैसला लिया गया। इस फैसले को ग्राम सभा में बाकायदा प्रस्ताव पास कर लागू किया गया है और गांव के प्रवेश द्वार पर इसका बोर्ड भी लगा दिया गया है।

Kanker News : क्यों लिया गया यह फैसला?

ग्रामिणों का कहना है कि यह कदम किसी धर्म के खिलाफ नहीं, बल्कि भोले-भाले आदिवासियों के हो रहे धर्मांतरण के विरोध में है। सुलगी गांव में 16 परिवार दूसरे धर्म को मानने लगे थे, जिनमें से दो को वापस हिंदू धर्म में लाया गया है, लेकिन 14 परिवार अभी भी धर्मांतरित हैं। इस स्थिति से गांव के रीति-रिवाज और सामाजिक सौहार्द पर नकारात्मक असर पड़ रहा है।

बोर्ड पर लिखा ‘पेशा अधिनियम 1996’ का हवाला

गांव के प्रवेश द्वार पर लगे बोर्ड पर ‘पेशा अधिनियम 1996’ का हवाला दिया गया है। इस अधिनियम के नियम 4(घ) के तहत ग्राम सभा को अपनी सांस्कृतिक पहचान और रूढ़िवादी संस्कृति को संरक्षित करने का अधिकार है। ग्रामीणों का मानना है कि प्रलोभन देकर किया जा रहा धर्मांतरण उनकी आदिम संस्कृति के लिए खतरा है।

कुडाल गांव से हुई शुरुआत

इस तरह की पहल की शुरुआत भानुप्रतापपुर ब्लॉक के कुडाल गांव से हुई थी। वहां भी ग्राम सभा ने सख्ती से पास्टर-पादरी के प्रवेश पर प्रतिबंध लगा दिया था। यह फैसला तब लिया गया था, जब एक धर्मांतरित महिला की मौत के बाद उसके अंतिम संस्कार को लेकर गांव में विवाद हुआ था। कुडाल गांव में यह निर्णय भारतीय संविधान की पांचवीं अनुसूची में दिए गए अधिकार के तहत लिया गया था, जो ग्राम सभा को अपनी परंपराओं और संस्कृति की रक्षा करने का अधिकार देता है।

Share The News

Unable to load videos.

Popular News

Related Articles

Popular Categories

This will close in 0 seconds