नई दिल्ली। उपराष्ट्रपति पद के लिए विपक्षी गठबंधन इंडिया ब्लॉक के उम्मीदवार और सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश बी. सुदर्शन रेड्डी ने खुद पर लगे नक्सल समर्थक होने के आरोपों को खारिज कर दिया है।
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दरअसल, केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने रेड्डी पर निशाना साधते हुए कहा था कि सलवा जुडुम मामले में उनका फैसला विचारधारा से प्रेरित था और यदि वह निर्णय न होता तो नक्सलवाद 2020 तक खत्म हो चुका होता। शाह ने यह भी कहा कि कांग्रेस ने वामपंथियों के दबाव में आकर नक्सल समर्थक को उपराष्ट्रपति पद का उम्मीदवार बनाया है।
रेड्डी ने जवाब में कहा— “मैंने आज तक कोई ऐसा काम नहीं किया, जिसके आधार पर कहा जा सके कि मैं नक्सलियों का समर्थक हूं। फैसला मेरा नहीं, सुप्रीम कोर्ट का था। मैंने केवल उसे लिखा था। तीन बार इस फैसले को बदलने की कोशिश हुई, लेकिन असफल रही। शायद पूरा जजमेंट पढ़ा नहीं गया। यह फैसला अच्छा है या बुरा, यह समाज तय करेगा।”
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उन्होंने राहुल गांधी पर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी से जुड़े सवाल पर कहा कि वह इस पर कोई टिप्पणी नहीं करेंगे, क्योंकि वह सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज हैं। वहीं पहलगाम आतंकी हमले को लेकर रेड्डी ने कहा कि “मैं कोई सिक्योरिटी एक्सपर्ट नहीं हूं, लेकिन निर्दोष लोगों की हत्या पर पूरे देश की एक ही राय है और मेरी भी वही राय है।”
‘ऑपरेशन सिंदूर’ और जातिगत जनगणना पर उन्होंने टिप्पणी से परहेज़ किया, जबकि कर्नाटक धर्मस्थल विवाद पर कहा कि इसकी जांच होनी चाहिए।
संविधान और लोकतंत्र पर चिंता जताते हुए रेड्डी ने कहा कि देश में लोकतंत्र का अभाव है और संविधान चुनौतियों से घिरा हुआ है। उन्होंने कहा कि संसद में गतिरोध लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा हो सकता है, लेकिन इसे स्थायी रूप से राजनीति का हिस्सा नहीं बनना चाहिए।
रेड्डी ने जोर देकर कहा कि उपराष्ट्रपति चुने जाने पर उनका संकल्प संविधान की रक्षा और संरक्षण करना होगा। “अब तक मैं संविधान की रक्षा कर रहा था, और भविष्य में भी यही मेरी यात्रा रहेगी।”











