krishna janmashtami : कृष्ण जन्माष्टमी का पर्व इस बार भी देशभर में बड़ी धूमधाम से मनाया जा रहा है। मध्यप्रदेश के ग्वालियर स्थित ऐतिहासिक गोपाल मंदिर में जन्माष्टमी के अवसर पर राधा-श्याम को करीब 100 करोड़ रुपये मूल्य के एंटीक आभूषणों से सजाया जाएगा। इन आभूषणों में हीरे, पन्ना, माणिक, पुखराज, नीलम, मोती से जड़े मुकुट, हार, बांसुरी, झुमके, नथ, चूड़ियां और पूजा के बर्तन शामिल हैं।
krishna janmashtami : ये आभूषण सालभर बैंक के लॉकर में सुरक्षित रहते हैं और जन्माष्टमी की सुबह ही विशेष सुरक्षा व्यवस्था के बीच मंदिर लाए जाते हैं। मंदिर प्रशासन की देखरेख में 200 से अधिक पुलिस जवान, CCTV और ट्रिपल-लेयर सिक्योरिटी लगाई जाती है। यह परंपरा सिंधिया शासनकाल से चली आ रही है और नगर निगम इनके रख-रखाव की जिम्मेदारी संभालता है।
krishna janmashtami : मथुरा और वृंदावन में भी जन्माष्टमी का उत्सव अद्भुत होता है। *बांके बिहारी मंदिर और इस्कॉन मंदिरों में फूलों से सजावट और विशेष श्रृंगार किया जाता है, वहीं द्वारका के द्वारकाधीश मंदिर में भव्य आरती और दर्शन के लिए हजारों श्रद्धालु उमड़ते हैं। देशभर के कृष्ण मंदिरों में श्रद्धालुओं का तांता लगा हुआ है। मध्यरात्रि में भगवान श्रीकृष्ण के जन्म के साथ ही मंदिरों में घंटियों, शंखों और जयकारों की गूंज गूंजेगी और भक्त उत्सव में डूब जाएंगे।
krishna janmashtami : पूरे देश में श्रीकृष्ण के 10 प्रमुख और प्रसिद्ध मंदिर
krishna janmashtami : जगन्नाथ मंदिर, पुरी – पुराणों में जगन्नाथ पुरी को धरती का बैकुंठ कहा गया है। यह मंदिर देश ही नहीं बल्कि पूरे विश्व में प्रसिद्ध है। पुरी का जगन्नाथ मंदिर हिंदुओं के चार धामों में से एक है और करीब 800 साल पुराना माना जाता है। मंदिर के शिखर पर स्थित झंडा हमेशा हवा की विपरीत दिशा में लहराता है। शिखर पर लगा सुदर्शन चक्र किसी भी दिशा से देखने पर ऐसा प्रतीत होता है कि वह आपकी ओर ही देख रहा है।
krishna janmashtami : प्रेम मंदिर, वृंदावन – वृंदावन का प्रेम मंदिर अपनी भव्यता और खूबसूरत सजावट के लिए प्रसिद्ध है। खासकर रात के समय यह मंदिर रंग-बिरंगी बदलती रोशनियों से चमकता रहता है। यहां श्रद्धालुओं की भीड़ दिन-रात बनी रहती है।
krishna janmashtami : इस्कॉन मंदिर, वृंदावन – जिसे कृष्ण बलराम मंदिर भी कहा जाता है। यह मंदिर 1975 में बनाया गया था। यहां राधा-कृष्ण और बलराम की मनोहारी प्रतिमाएं विराजमान हैं। इस मंदिर में श्रद्धालु कीर्तन और भक्ति में लीन रहते हैं। यहां विदेशी श्रद्धालुओं की संख्या भी काफी होती है।
krishna janmashtami : द्वारकाधीश मंदिर, मथुरा – मथुरा स्थित द्वारकाधीश मंदिर की आरती विशेष रूप से आकर्षक मानी जाती है। मंदिर में मुरली मनोहर की सुंदर प्रतिमा स्थापित है। पास ही यमुना नदी के घाटों पर श्रद्धालु पूजा-अर्चना और नौका-विहार का आनंद लेते हैं।
krishna janmashtami : श्रीनाथजी मंदिर, नाथद्वारा, राजस्थान – नाथद्वारा का श्रीनाथजी मंदिर अपनी अद्भुत मूर्तियों के लिए प्रसिद्ध है। माना जाता है कि औरंगजेब से बचाने के लिए गोवर्धन से मूर्तियां यहां लाई गई थीं। यह मंदिर 12वीं शताब्दी का है और श्रीकृष्ण की गोवर्धनधारी रूप की पूजा यहां होती है।
krishna janmashtami : इस्कॉन मंदिर, बैंगलोर – यह भारत के सबसे बड़े इस्कॉन मंदिरों में से एक है। इसका निर्माण 1997 में हुआ था। मंदिर वैदिक संस्कृति और धार्मिक सभ्यताओं के प्रचार-प्रसार का केंद्र है। यहां बुजुर्ग और विकलांग श्रद्धालुओं के लिए लिफ्ट की सुविधा भी उपलब्ध है।
krishna janmashtami : श्री रंछोड़जी महाराज मंदिर, दकोर, गुजरात – गोमती नदी के किनारे स्थित यह मंदिर 1772 में मराठा शासनकाल में बना था। इसमें आठ गुंबद और 24 सोने की बुर्ज हैं। इस मंदिर में लक्ष्मीजी का भी मंदिर है और मान्यता है कि हर शुक्रवार को श्रीकृष्ण उनसे मिलने आते हैं।
krishna janmashtami : अरुलमिगु श्री पार्थसारथी स्वामी मंदिर, चेन्नई – यह मंदिर 8वीं सदी में बनाया गया था और दक्षिण भारत के प्रमुख वैष्णव मंदिरों में गिना जाता है। यहां भगवान विष्णु के कई रूपों की प्रतिमाएं स्थापित हैं, जो श्रद्धालुओं को आकर्षित करती हैं।
krishna janmashtami : बालकृष्ण मंदिर, हंपी, कर्नाटक – हंपी का यह मंदिर अपनी अद्भुत स्थापत्य कला के लिए मशहूर है। इसे यूनेस्को की वर्ल्ड हेरिटेज साइट में शामिल किया गया है। यहां भगवान कृष्ण के बाल रूप की पूजा होती है।
krishna janmashtami : उडुपी श्रीकृष्ण मठ, कर्नाटक – यह मंदिर 13वीं सदी में बनाया गया था और दक्षिण भारत के प्रमुख कृष्ण तीर्थों में से एक है। मंदिर के पास स्थित तालाब के पानी में इसका सुंदर प्रतिबिंब दिखाई देता है। यह स्थल भक्ति और आध्यात्मिक शांति का केंद्र माना जाता है।














