Jabalpur News : जबलपुर : मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की जबलपुर बेंच ने एक सुनवाई के दौरान राज्य की न्यायिक व्यवस्था पर चौंकाने वाली और तल्ख टिप्पणी की है। एक याचिका की सुनवाई करते हुए जस्टिस अतुल श्रीधरन और जस्टिस दिनेश कुमार पालीवाल की बेंच ने कहा-हाई कोर्ट और जिला कोर्ट के संबंध सामंती और गुलामी जैसे हैं।हाई कोर्ट खुद को सवर्ण और जिला कोर्ट को शूद्र मानता है।जिला अदालतों के जज जब हाईकोर्ट के जजों से मिलते हैं, तो उनकी हालत बिना रीढ़ की हड्डी वाले, गिड़गिड़ाते व्यक्ति जैसी होती है।इस डर के माहौल में निष्पक्ष न्याय संभव नहीं, सिर्फ दिखावा होता है।यह टिप्पणी भोपाल जिला कोर्ट के पूर्व विशेष न्यायाधीश जगत मोहन चतुर्वेदी की याचिका** पर सुनवाई के दौरान आई।
Jabalpur News:क्या था मामला:
Jabalpur News:जज चतुर्वेदी को **2015 में व्यापमं घोटाले से जुड़े एक आरोपी को जमानत देने पर पक्षपात के आरोप में हाईकोर्ट की फुल कोर्ट ने बर्खास्त कर दिया था। उन्होंने हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती दी थी। हाईकोर्ट ने अब आदेश दिया है कि उन्हें बैकवेजेस और पेंशन दी जाए और 5 लाख रुपये मुआवजा भी दिया जाए।
Jabalpur News: हाईकोर्ट ने कहा:अगर बार-बार हाईकोर्ट छोटी बातों पर सख्ती दिखाता है तो जिला कोर्ट के जज डरने लगते हैं।न्यायिक स्वतंत्रता केवल कागज़ों में रह जाती है, ज़मीनी हकीकत में नहीं उतरती। यह टिप्पणी देशभर की न्यायिक व्यवस्था में व्याप्त ताकत के असंतुलन और न्यायिक अनुशासन के नाम पर दबाव की संस्कृति पर बड़ा सवाल खड़ा करती है।











