Wednesday, May 20, 2026
31.1 C
Raipur

Bastar Dussehra 2025 : पाट जात्रा के साथ शुरू हुआ विश्व प्रसिद्ध पर्व, 75 दिनों तक चलेगा भव्य आयोजन

Bastar Dussehra 2025 : जगदलपुर। हरियाली अमावस्या के पावन अवसर पर छत्तीसगढ़ के बस्तर क्षेत्र में गुरुवार को विश्व प्रसिद्ध बस्तर दशहरा का आगाज पारंपरिक पाट जात्रा पूजा विधान के साथ हो गया। यह दशहरा पर्व भारत के सबसे लंबे चलने वाले उत्सवों में से एक है, जो करीब 75 दिनों तक चलता है और आदिवासी परंपराओं, लोक आस्था और सांस्कृतिक विविधता का भव्य प्रतीक है।

मां दंतेश्वरी मंदिर से पाट जात्रा की शुरुआत

बस्तर की आराध्य देवी मां दंतेश्वरी के मंदिर प्रांगण में पारंपरिक विधि-विधान के साथ रथ निर्माण में प्रयुक्त होने वाले औजारों की पूजा की गई। ठुरलू खोटला और अन्य उपकरणों को वैदिक मंत्रों और स्थानीय रीति-रिवाजों के अनुसार पूजकर रथ निर्माण की विधिवत शुरुआत हुई।

इस अवसर पर बस्तर सांसद एवं दशहरा समिति अध्यक्ष महेश कश्यप, जगदलपुर विधायक किरण देव, महापौर संजय पांडे सहित मांझी-चालकी, मेम्बर-मेम्बरीन, पुजारी-गायता, पटेल, नाईक-पाईक, सेवादारों और बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया।

क्या है पाट जात्रा

पाट जात्रा बस्तर दशहरा की शुरुआत मानी जाती है। यह रथ निर्माण की रस्म है, जिसमें देवी के रथ के लिए लकड़ियों और औजारों की पूजा की जाती है। यह केवल धार्मिक क्रिया नहीं बल्कि पूरे दशहरा आयोजन की आधारशिला होती है।

बस्तर दशहरा 2025: प्रमुख तिथियां और पूजा विधान

तारीख पूजा / आयोजन
05 सितंबर (शुक्रवार) डेरी गड़ाई पूजा विधान
21 सितंबर (रविवार) काछनगादी पूजा विधान
22 सितंबर (सोमवार) कलश स्थापना पूजा विधान
23 सितंबर (मंगलवार) जोगी बिठाई पूजा विधान
24 – 29 सितंबर नवरात्रि पूजा एवं रथ परिक्रमा
29 सितंबर (सोमवार) बेल पूजा (प्रातः 11 बजे)
30 सितंबर (मंगलवार) महाअष्टमी व निशा जात्रा पूजा विधान
01 अक्टूबर (बुधवार) कुंवारी पूजा, जोगी उठाई, मावली परघाव
02 अक्टूबर (गुरुवार) भीतर रैनी व रथ परिक्रमा
03 अक्टूबर (शुक्रवार) बाहर रैनी व रथ परिक्रमा
04 अक्टूबर (शनिवार) काछन जात्रा व मुरिया दरबार
05 अक्टूबर (रविवार) कुटुंब जात्रा (ग्राम्य देवी-देवताओं की विदाई)
07 अक्टूबर (मंगलवार) मावली माता की डोली विदाई, पर्व का समापन
  • यह दशहरा रावण वध की कथा पर आधारित नहीं है, बल्कि मां दंतेश्वरी देवी और आदिवासी परंपराओं के सम्मान का प्रतीक है।
  • दशहरा की 75 दिन लंबी अवधि इसे देश के अन्य किसी भी पर्व से अलग बनाती है।
  • रथ यात्रा, देवी की डोली, मावली परघाव जैसे आयोजनों में लाखों श्रद्धालु शामिल होते हैं।
  • यह पर्व जनजातीय संस्कृति, समाज की एकता, और आध्यात्मिक भक्ति का अद्भुत संगम है।

सुरक्षा और तैयारियां

जिला प्रशासन और बस्तर दशहरा समिति ने इस बार भीड़ प्रबंधन, स्वास्थ्य सेवाएं, पर्यटन सुविधाएं, और सुरक्षा प्रबंधों को लेकर विस्तृत तैयारियां की हैं। दशहरा के हर आयोजन स्थल पर CCTV, ड्रोन निगरानी, और स्वयंसेवकों की टीम तैनात की गई है।

समापन समारोह: मावली माता की विदाई

07 अक्टूबर को देवी मावली की डोली की विदाई के साथ यह ऐतिहासिक पर्व सम्पन्न होगा। यह आयोजन श्रद्धालुओं की आंखों में आंसू और दिलों में आस्था का सैलाब छोड़ जाता है।

Share The News

Unable to load videos.

Popular News

CG Transfer Breaking : वाणिज्यिक कर विभाग में बड़ा फेरबदल, 21 कर्मचारियों का तबादला

CG Transfer Breaking :रायपुर। राज्य शासन के वाणिज्यिक कर...

Raipur Police Commissioner: IPS डॉ. संजीव शुक्ला ने संभाला पुलिस आयुक्त का पदभार… जानिए क्या कुछ कहा

Raipur Police Commissioner:रायपुर : रायपुर पुलिस कमिश्नरेट प्रणाली के...

सलासर बालाजी धाम में भक्ति का सैलाब, प्रभात आरती में गूंजा “जय श्री बालाजी”

राजस्थान के चूरू जिले स्थित प्रसिद्ध सलासर बालाजी धाम...

Related Articles

Popular Categories