Kitchen Chopping Board Hygiene: रसोई में रखे चॉपिंग बोर्ड को कब बदलना चाहिए, क्या आप जानते हैं इसका सही समय?

VIKASH KHALKHO

नई दिल्ली। Nishaanebaz.com-Kitchen Chopping Board Hygiene: हमारे किचन में फल, सब्जियां, सलाद और अन्य खाद्य पदार्थों को काटने के लिए चॉपिंग बोर्ड का इस्तेमाल रोजाना किया जाता है। नियमित रूप से इस्तेमाल होने के कारण इस पर लगातार चाकू के निशान पड़ने लगते हैं, जिससे धीरे-धीरे इसकी पूरी सतह खुरदरी और खराब होने लगती है। ऐसे में अक्सर लोगों के मन में यह सवाल उठता है कि आखिर चॉपिंग बोर्ड को कितने समय बाद बदल देना चाहिए और पुराने या कटे-फटे बोर्ड का इस्तेमाल करते रहने से सेहत को क्या-क्या नुकसान हो सकते हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक, चॉपिंग बोर्ड को रिप्लेस करने की कोई एक तय एक्सपायरी डेट नहीं होती, बल्कि इसका फैसला पूरी तरह से बोर्ड की मौजूदा भौतिक स्थिति को देखकर किया जाना चाहिए।

समय के साथ जब चॉपिंग बोर्ड पर अनगिनत गहरे कट और खांचे बनने लगते हैं, तो उनकी नियमित और गहरी सफाई करना बेहद कठिन हो जाता है। इन बारीक दरारों और खांचों में सब्जियों के सूक्ष्म टुकड़े और खतरनाक बैक्टीरिया आसानी से फंस जाते हैं। अगर अच्छी तरह से धोने के बाद भी बोर्ड पर जमी गंदगी साफ नहीं हो रही है, तो उसे तुरंत बदल देना समझदारी है। बाजार में चॉपिंग बोर्ड मुख्य रूप से लकड़ी, बांस और प्लास्टिक जैसे अलग-अलग मटेरियल्स से मिलते हैं, जिनकी उम्र उनकी बनावट और देखभाल पर निर्भर करती है। यदि लकड़ी के बोर्ड में गहरी दरारें आ गई हैं या वह टूटने लगा है, अथवा प्लास्टिक के बोर्ड पर बहुत ज्यादा गहरे निशान बन गए हैं, तो नया बोर्ड ले लेना चाहिए।

सिर्फ बोर्ड के पुराने होने के आधार पर उसे बदलना जरूरी नहीं है, बल्कि उसकी सतह की हालत पर विशेष नजर रखनी चाहिए। यदि चॉपिंग बोर्ड से लगातार किसी प्रकार की बदबू आ रही है, उस पर फफूंदी (Mold) नजर आने लगी है या वह नमी के कारण अंदर से खराब हो गया है, तो उसे बिल्कुल नजरअंदाज न करें। इस्तेमाल के बाद बोर्ड को हमेशा गुनगुने पानी और एंटीबैक्टीरियल साबुन से अच्छी तरह धोना चाहिए और स्टोर करने से पहले उसे पूरी तरह सूखा लेना आवश्यक है।

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किचन में क्रॉसमैड कंटामिनेशन (Cross-contamination) से बचने के लिए भी विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। कच्चे चिकन, मांस और मछली में मौजूद खतरनाक बैक्टीरिया आसानी से सब्जियों या बिना पकाए खाए जाने वाले फलों तक पहुंच सकते हैं। इस गंभीर जोखिम से बचने के लिए यह सबसे बेहतर तरीका है कि मांसाहारी उत्पादों और शाकाहारी सब्जियों के लिए अलग-अलग चॉपिंग बोर्ड का इस्तेमाल किया जाए। हर बार उपयोग के बाद बोर्ड को हवादार जगह पर रखें ताकि उसमें नमी न रुके। यदि बोर्ड इस हद तक खराब हो चुका है कि उसे कीटाणुमुक्त करना संभव नहीं है, तो उसे बिना देरी के बदल देना चाहिए, ताकि खाने के जरिए शरीर में हानिकारक बैक्टीरिया और गंदगी पहुंचने के खतरे को कम किया जा सके।

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विकास कुमार खलखो एक डिजिटल पत्रकार, समाचार संपादक और SEO कंटेंट क्रिएटर हैं, जिन्हें पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में एक दशक से अधिक का अनुभव है। उन्होंने BJMC, Master of Journalism (MJ) और M.Phil. (मीडिया स्टडीज़) की डिग्री हासिल की है और दबंग दुनिया, हमर छत्तीसगढ़ योजना, हरिभूमि, सन स्टार डेली न्यूज़ और छत्तीसगढ़ की आवाज़ जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों के साथ काम किया है। उन्हें हिंदी पत्रकारिता, ब्रेकिंग न्यूज़ कवरेज, SEO-फ्रेंडली कंटेंट राइटिंग, डिजिटल पब्लिशिंग, कंटेंट स्ट्रैटेजी, थंबनेल डिज़ाइन और सोशल मीडिया मैनेजमेंट में विशेष महारत हासिल है। उनका उद्देश्य सटीक, निष्पक्ष और विश्वसनीय पत्रकारिता के माध्यम से पाठकों तक प्रभावशाली समाचार पहुँचाना और साथ ही उच्च गुणवत्ता वाला डिजिटल कंटेंट तैयार करना है।
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