सुकमा। Nishaanebaz.com-Sukma Women Commandos Garba: घने जंगलों और अति-संवेदनशील इलाकों में हाथों में एके-47 रायफल लेकर नक्सल मोर्चे पर दुश्मनों का डटकर सामना करने वाली महिला कमांडो जब पारंपरिक परिधानों में गरबा और डांडिया की धुन पर थिरकीं, तो पूरा माहौल उमंग और उत्साह से सराबोर हो गया। सुकमा जिले में कर्तव्य के मोर्चे पर अदम्य साहस और बहादुरी का परिचय देने वाली इन महिला जवानों ने पहली बार किसी सांस्कृतिक मंच पर गरबा-डांडिया में हिस्सा लेकर अपने हुनर का एक बिल्कुल अलग और प्रेरणादायक रंग प्रस्तुत किया है।
जिला मुख्यालय स्थित रक्षित केंद्र (पुलिस लाइन) में पुलिस अधीक्षक मयंक गुर्जर की विशेष पहल पर पहली बार इस एक दिवसीय भव्य गरबा-डांडिया महोत्सव का आयोजन किया गया था। इस अनूठे आयोजन में वर्षों से नक्सल प्रभावित अंदरूनी क्षेत्रों में तैनात महिला कमांडो और ‘दुर्गा फाइटर’ दस्ता की जांबाज महिला जवानों ने पूरे उत्साह के साथ भागीदारी की। केवल पुलिस विभाग ही नहीं, बल्कि इस कार्यक्रम में पुलिस परिवार की महिलाओं व बच्चों के साथ-साथ शहीद परिवारों की महिलाओं और बच्चों ने भी शिरकत की, जिससे यह पूरा आयोजन आत्मीयता और एकजुटता का प्रतीक बन गया।
सुकमा में AK-47 वाली महिला कमांडो गरबा-डांडिया पर थिरकीं, पुलिस लाइन में पहली बार हुआ आयोजन।
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— Nishaanebaz.com (@nishaanebaz_com) October 18, 2026
घने जंगलों में कठिन और चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों के बीच दिन-रात मुस्तैदी से अपनी ड्यूटी निभाने वाली महिला कमांडो के लिए यह आयोजन अपनी रोजमर्रा की तनावभरी दिनचर्या से इतर एक नई ऊर्जा भरने वाला अवसर साबित हुआ। संगीत की धुन और ताल पर प्रतिभागियों ने एक से बढ़कर एक प्रस्तुतियां दीं। इस एक दिवसीय आयोजन के अंत में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाली महिला प्रतिभागियों को अधिकारियों द्वारा स्मृति चिन्ह और पुरस्कार देकर प्रोत्साहित व सम्मानित भी किया गया।
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कार्यक्रम में महिला जवानों और परिवारों का हौसला बढ़ाने के लिए जिले के कई वरिष्ठ प्रशासनिक व पुलिस अधिकारी अपने परिजनों के साथ उपस्थित रहे। इनमें सीआरपीएफ डीआईजी आनंद सिंह, कलेक्टर अमित कुमार, पुलिस अधीक्षक मयंक गुर्जर, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक रोहित शाह, एएसपी मनोज तिर्की, वन विभाग के एसडीओ परख सारडा तथा रक्षित केंद्र अधिकारी रवि उपाध्याय शामिल रहे। अधिकारियों की आत्मीय मौजूदगी ने पुलिस बल और शहीद परिवारों के बीच आपसी जुड़ाव को और अधिक मजबूती दी। यह अभिनव पहल न केवल पुलिस परिवारों को एक मंच पर लाने में सफल रही, बल्कि सुरक्षा मोर्चे पर तैनात महिला जवानों की प्रतिभा को भी सामने लेकर आई।