नई दिल्ली। Nishaanebaz.com-Reliance Jio Mega IPO: देश की सबसे बड़ी टेलीकॉम कंपनी रिलायंस जियो अपने बहुप्रतीक्षित 30,213 करोड़ रुपए के आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (IPO) के साथ शेयर बाजार में दस्तक देने की पूरी तैयारी में है। यह मेगा आईपीओ 21 से 23 अक्टूबर 2026 के बीच दांव लगाने के लिए खुलने जा रहा है। आईपीओ से ठीक पहले जीईपीएल कैपिटल (GEPL Capital), वेंचुरा सिक्योरिटीज (Ventura Securities) और एसएमसी ग्लोबल (SMC Global) जैसी देश की प्रमुख ब्रोकरेज कंपनियों ने विस्तृत रिपोर्ट जारी कर जियो के भविष्य की मजबूत नींव और आगे बढ़ने के चार सबसे बड़े अवसरों को रेखांकित किया है। इन ब्रोकरेज फर्म्स के मुताबिक, जियो के पास 2G यूजर्स को 4G/5G में कन्वर्ट करने, होम ब्रॉडबैंड के विस्तार, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और विदेशों में अपनी स्वदेशी टेक्नोलॉजी बेचने के चार ऐसे मौके हैं जो कंपनी को नई बुलंदियों पर ले जाएंगे।
चालू वित्त वर्ष में जून 2026 तक के आंकड़ों पर नजर डालें तो रिलायंस जियो का कुल ग्राहक आधार 53.33 करोड़ (533.3 मिलियन) के विशाल आंकड़े को पार कर चुका है। अब कंपनी सिर्फ पारंपरिक मोबाइल कनेक्टिविटी तक सीमित न रहकर आय के नए-नए डिजिटल जरियों पर तेजी से ध्यान केंद्रित कर रही है। ब्रोकरेज फर्म GEPL Capital के अनुमान के मुताबिक, 30 जून 2026 तक भारत में करीब 26.1 करोड़ लोग अभी भी पुराने 2G नेटवर्क का इस्तेमाल कर रहे हैं। जियो के लिए यह एक बहुत बड़ा बाजार है। कंपनी महज 799 रुपए की बेहद किफ़ायती कीमत वाले ‘JioBharat’ फोन और उसके साथ बंडल डिजिटल सेवाओं के जरिए इन 2G ग्राहकों को सीधे अपने नेटवर्क से जोड़ने की रणनीति पर तेजी से काम कर रही है। इसके साथ ही प्रीमियम प्लान्स, टैरिफ दरों में बढ़ोतरी और बंडल सर्विसेज के दम पर कंपनी का प्रति यूजर औसतन राजस्व (ARPU) भी वित्त वर्ष 2024 के 181.7 रुपए से बढ़कर Q1FY27 में 215.6 रुपए तक पहुंच चुका है।
ग्रोथ के दूसरे सबसे बड़े इंजन के रूप में होम ब्रॉडबैंड सेक्टर उभरकर सामने आया है। जून 2026 तक JioFiber और JioAirFiber के कुल ग्राहकों की संख्या 2.86 करोड़ दर्ज की गई, जिसमें से अकेले JioAirFiber के 1.4 करोड़ एक्टिव यूजर हैं। जीईपीएल की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में फिक्स्ड ब्रॉडबैंड की पहुंच फिलहाल केवल 21 फीसदी (FY26) है, जिसके वित्त वर्ष 2031 तक उछलकर 46 फीसदी तक पहुंचने का अनुमान है। एसएमसी ग्लोबल का मानना है कि जिन इलाकों में ऑप्टिकल फाइबर बिछाना बहुत कठिन या खर्चीला है, वहां JioAirFiber बिना किसी रुकावट के हाई-स्पीड इंटरनेट पहुंचाने का काम कर रहा है।
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कंपनी के विकास का तीसरा महत्वपूर्ण स्तंभ उसकी खुद की विकसित की गई स्वदेशी तकनीक और एआई प्लेटफॉर्म है। वेंचुरा सिक्योरिटीज की रिपोर्ट के अनुसार, जियो ने अपना पूरा 5G स्टैंडअलोन (SA) नेटवर्क इन-हाउस तैयार किया है और 4G, 5G, 6G, AI तथा डिजिटल टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में कुल 7,220 पेटेंट के लिए आवेदन किया है। कंपनी का अपना एआई प्लेटफॉर्म ‘JioBrain’ नेटवर्क संचालन में पहले से इस्तेमाल हो रहा है और अब इसे अन्य एंटरप्राइज कंपनियों को बेचकर सीधी कमाई करने का खाका तैयार किया गया है। एसएमसी ग्लोबल के विश्लेषकों का कहना है कि टेलीकॉम, क्लाउड और एआई के इस त्रिकोणीय मेल से जियो को केवल डेटा रिचार्ज के अलावा बी2बी (B2B) सेगमेंट से भी बड़ा राजस्व मिलेगा।
चौथे और अंतिम ग्रोथ इंजन के तहत जियो अपनी इनहाउस टेलीकॉम और एआई टेक्नोलॉजी को दुनिया भर के अन्य विदेशी टेलीकॉम ऑपरेटर्स को लाइसेंस करने की योजना पर आगे बढ़ रही है। एसएमसी ग्लोबल के अनुसार, इस रणनीतिक पार्टनरशिप मॉडल से रिलायंस जियो को बिना विदेशों में खुद का भारी-भरकम इंफ्रास्ट्रक्चर खड़ा किए ही अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी मजबूत पैठ बनाने और वैश्विक राजस्व अर्जित करने में बड़ी मदद मिलेगी। भारत में लगातार बढ़ रही डेटा खपत, 5G नेटवर्क के फैलाव और ब्रॉडबैंड की भारी मांग के बीच, जियो का यह 30,213 करोड़ रुपए का आईपीओ न केवल निवेशकों के लिए बल्कि पूरे भारतीय टेलीकॉम सेक्टर के लिए एक ऐतिहासिक मील का पत्थर साबित होने जा रहा है।