Wednesday, August 19, 2026
Home National Aravalli Hills विवाद पर SC सख्त! विशेषज्ञ समिति की सिफारिशों पर लगाई...

Aravalli Hills विवाद पर SC सख्त! विशेषज्ञ समिति की सिफारिशों पर लगाई अस्थायी रोक

Aravalli Row:
अरावली विवाद पर SC सख्त

नई दिल्ली : अरावली पर्वतमाला को लेकर जारी विवाद पर सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में अहम सुनवाई हुई। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली वैकेशन बेंच ने आदेश दिया कि विशेषज्ञ समिति की सिफारिशें और उन पर अदालत की आगे की टिप्पणियां फिलहाल स्थगित (abeyance) रहेंगी। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि अगली सुनवाई तक इन सिफारिशों को लागू नहीं किया जाएगा।

21 जनवरी 2026 को अगली सुनवाई

सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले की अगली सुनवाई की तारीख 21 जनवरी 2026 तय की है। अदालत ने यह भी संकेत दिया कि तब तक मौजूदा स्थिति यथावत बनी रहेगी।

Read More : मध्य प्रदेश में Holiday Calendar 2026 जारी! 238 दिन खुलेंगे दफ्तर, 127 दिन रहेगी छुट्टी, 6 छुट्टियों का नुकसान

SG तुषार मेहता ने क्या कहा

सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने दलील दी कि अरावली मामले में कोर्ट के आदेशों, सरकार की भूमिका और पूरी प्रक्रिया को लेकर कई तरह की गलतफहमियां फैलाई जा रही हैं। उन्होंने कहा कि इन्हीं भ्रमों को दूर करने के उद्देश्य से विशेषज्ञ समिति का गठन किया गया था।

CJI ने जताई गलत व्याख्या की आशंका

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि अदालत को भी यह महसूस हो रहा है कि समिति की रिपोर्ट और अदालत की टिप्पणियों को लेकर गलत अर्थ निकाले जा रहे हैं। उन्होंने संकेत दिया कि भविष्य में एक स्पष्ट स्पष्टीकरण (clarification) की आवश्यकता पड़ सकती है, ताकि अदालत की मंशा को लेकर किसी तरह का भ्रम न रहे।

क्या है अरावली पर्वतमाला विवाद

दरअसल, सुप्रीम कोर्ट ने 20 नवंबर 2025 को केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय द्वारा गठित समिति की सिफारिशों को स्वीकार किया था। समिति ने जमीन से 100 मीटर या उससे अधिक ऊंचाई वाली पहाड़ियों को ही अरावली पर्वतमाला मानने का सुझाव दिया था।

इस फैसले के बाद राजस्थान, हरियाणा और दिल्ली-एनसीआर में विरोध तेज हो गया। पर्यावरण कार्यकर्ताओं और विपक्षी दलों ने आशंका जताई कि 100 मीटर से कम ऊंचाई वाली पहाड़ियों में खनन की अनुमति मिलने से अरावली का अस्तित्व खतरे में पड़ सकता है।

पर्यावरण बनाम विकास की बहस

पर्यावरणविदों का कहना है कि अरावली क्षेत्र पहले से ही गोदावर्मन और एमसी मेहता मामलों के तहत संरक्षित रहा है। वहीं केंद्र सरकार का तर्क है कि संरक्षण व्यवस्था बनी रहेगी और इसे लेकर फैली आशंकाएं निराधार हैं।

Share The News

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here