भिंड (लहार)। Nishaanebaz.com-Lahar Teachers Protest TET Exam: मध्य प्रदेश के भिंड जिले के लहार में शासकीय स्कूलों में पदस्थ शिक्षकों का आक्रोश अब सड़कों से निकलकर भगवान के दरबार तक पहुंच गया है। वर्षों से सरकारी स्कूलों में प्राथमिक शिक्षा की नींव मजबूत कर रहे अध्यापकों पर अचानक शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) की अनिवार्यता थोपे जाने के विरोध में शिक्षकों ने मोर्चा खोल दिया है। अध्यापक अधिकार संयुक्त मोर्चा के बैनर तले एकत्रित हुए शिक्षकों ने अपनी समस्याओं के समाधान के लिए ‘काँकसी सरकार’ यानी प्रसिद्ध दंडाधिकारी हनुमान जी के मंदिर में अनोखे अंदाज में ज्ञापन सौंपा।
प्रदर्शनकारी अध्यापकों का तर्क है कि जो शिक्षक अपने लंबे शैक्षणिक अनुभव के बल पर वर्षों से बच्चों का भविष्य संवार रहे हैं, उन पर सेवा के इस पड़ाव में पात्रता परीक्षा थोपना पूरी तरह से अनुचित और अन्यायपूर्ण है। शिक्षकों ने मंदिर परिसर में भगवान हनुमान जी के चरणों में अपनी 6 सूत्रीय मांगों का ज्ञापन समर्पित किया और ईश्वर से प्रार्थना की कि वे प्रदेश सरकार को सद्बुद्धि दें ताकि शिक्षकों के हित में न्यायसंगत निर्णय लिया जा सके।
भिंड के लहार में TET अनिवार्यता के विरोध में शिक्षकों का अनोखा प्रदर्शन। हनुमान मंदिर में 6 सूत्रीय मांगों का ज्ञापन सौंपा, भोपाल में आंदोलन की चेतावनी।#भिंड #लहार #शिक्षक #TET #मध्यप्रदेश #Bhind #Lahar #TeachersProtest #TETExam #Nishaanebaz pic.twitter.com/58IkhOY4zD
— Nishaanebaz.com (@nishaanebaz_com) September 20, 2026
शिक्षकों द्वारा प्रस्तुत ज्ञापन में मुख्य रूप से मांग की गई है कि वर्षों से कार्यरत एवं अनुभवी अध्यापकों को TET परीक्षा से पूरी तरह मुक्त रखा जाए। इसके अलावा शिक्षकों की अन्य प्रमुख मांगों में प्रथम नियुक्ति तिथि से सेवा वरिष्ठता का लाभ देना, पुरानी पेंशन योजना (OPS) की बहाली, सेवानिवृत्ति पर ग्रेच्युटी एवं अवकाश नगदीकरण की सुविधा प्रदान करना तथा ई-अटेंडेंस (E-Attendance) व्यवस्था में आ रही तकनीकी विसंगतियों को तत्काल दूर करना शामिल है।
आजाद अध्यापक संघ के प्रांतीय अध्यक्ष संतोष लहरिया ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि राज्य सरकार ने समय रहते शिक्षकों की इन जायज मांगों पर सकारात्मक रुख नहीं अपनाया, तो यह विरोध प्रदर्शन केवल लहार तक सीमित नहीं रहेगा। शिक्षकों ने स्पष्ट अल्टीमेटम दिया है कि अपनी मांगों को मनवाने के लिए वे प्रांतीय स्तर पर भोपाल की सड़कों पर उतरकर बड़ा आंदोलन करने के लिए मजबूर होंगे, जिसकी संपूर्ण जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।







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