Friday, September 11, 2026
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BRICS में शी जिनपिंग और पुतिन, भारत के लिए बन रहा बड़ा मौका! व्यापार पर बड़ा दांव

India China Relations/ Brics 2026: निशानेबाज न्यूज़ डेस्क- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने BRICS Summit 2026 को लेकर सोशल मीडिया पर अहम संदेश साझा किया है। उन्होंने कहा कि आने वाले दिनों में दुनिया के कई प्रमुख नेता ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए एक साथ आएंगे। भारत की मेजबानी में होने वाला यह सम्मेलन वैश्विक मंच पर देश की बढ़ती भूमिका के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।पीएम मोदी ने उम्मीद जताई कि सम्मेलन में दुनिया के सामने मौजूद महत्वपूर्ण मुद्दों पर सकारात्मक और सार्थक बातचीत होगी। साथ ही, अलग-अलग देशों के नेता विश्व कल्याण की दिशा में मिलकर आगे बढ़ने पर चर्चा करेंगे।

BRICS Summit 2026 की सबसे अहम घटनाओं में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की भारत यात्रा भी शामिल है। शी जिनपिंग करीब सात साल बाद भारत पहुंच रहे हैं। वह 12 और 13 सितंबर को होने वाले ब्रिक्स सम्मेलन में हिस्सा लेंगे।उनकी यात्रा ऐसे समय हो रही है जब भारत और चीन के रिश्ते पिछले कुछ वर्षों में तनावपूर्ण रहे हैं। 2020 में सीमा पर हुई झड़प के बाद दोनों देशों के संबंधों में दूरी बढ़ी थी। हालांकि, राजनीतिक तनाव के बावजूद दोनों देशों के बीच व्यापार लगातार जारी रहा है।अब शी जिनपिंग की यात्रा के दौरान दोनों देशों के रिश्तों में आर्थिक पहलू पर खास ध्यान रहने की उम्मीद है। भारत की कोशिश होगी कि संबंधों में सुधार का फायदा केवल बातचीत तक सीमित न रहे, बल्कि भारतीय कारोबार और कंपनियों को भी इसका लाभ मिले।

चीन के साथ भारत का व्यापार घाटा सबसे बड़ी चिंता
भारत के लिए चीन के साथ व्यापार में असंतुलन लंबे समय से बड़ी चुनौती बना हुआ है। वित्त वर्ष 2025-26 में भारत ने चीन से करीब 131.6 अरब डॉलर का सामान खरीदा। इसके मुकाबले भारत का चीन को निर्यात लगभग 19.5 अरब डॉलर रहा।इस तरह दोनों देशों के बीच भारत का व्यापार घाटा 112 अरब डॉलर से ज्यादा रहा। यही वजह है कि चीन के साथ संबंधों में सुधार के बीच व्यापार का मुद्दा भारत के लिए बेहद अहम रहने वाला है।जुलाई में भी चीन से भारत का आयात सालाना आधार पर 34.4 फीसदी बढ़कर करीब 14.67 अरब डॉलर पहुंच गया। दूसरी ओर, इसी अवधि में भारत का चीन को निर्यात 64.6 फीसदी बढ़कर 2.20 अरब डॉलर रहा।

भारत की नजर चीन के बाजार पर भी
भारत की कोशिश केवल चीन से आयात कम करने की नहीं है। नई दिल्ली चाहती है कि भारतीय उत्पादों को चीन के बाजार में भी ज्यादा जगह मिले।लंबे समय के आंकड़े बताते हैं कि 2019 से 2024 के बीच चीन से भारत का आयात 122.2 फीसदी बढ़ा, जबकि चीन को भारत का निर्यात सिर्फ 0.1 फीसदी बढ़ा। ऐसे में भारत-चीन संबंध बेहतर होने की स्थिति में व्यापार संतुलन को सुधारना भारत की प्राथमिकताओं में रह सकता है।भारत यह भी चाहता है कि चीन से निवेश बढ़े, लेकिन इसके साथ घरेलू कंपनियों और जरूरी क्षेत्रों में आत्मनिर्भरता पर भी ध्यान बना रहे।
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जरूरी सामान और खनिजों पर निर्भरता घटाना चुनौती
चीन भारत के लिए कई औद्योगिक सामान और जरूरी सामग्री का बड़ा स्रोत है। इसलिए दोनों देशों के रिश्तों में सुधार के साथ भारत के सामने एक दूसरा लक्ष्य भी रहेगा—जरूरत से ज्यादा निर्भरता को धीरे-धीरे कम करना।जरूरी खनिज, उद्योग से जुड़ी सामग्री और दूसरी अहम आपूर्ति में विविधता लाना भारत के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है। ऐसे में BRICS Summit 2026 केवल राजनीतिक बातचीत का मंच नहीं, बल्कि आर्थिक हितों पर चर्चा का अवसर भी बन सकता है।

रूस के साथ भी आर्थिक सहयोग पर जोर
इसी बीच रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन तीन दिन के भारत दौरे पर दिल्ली पहुंच चुके हैं। उनका यह दौरा भी BRICS Summit 2026 के लिहाज से महत्वपूर्ण है। पुतिन करीब 60 घंटे भारत में रहेंगे और इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ द्विपक्षीय बातचीत के अलावा कई कार्यक्रमों में हिस्सा लेंगे।पुतिन BRICS बिजनेस फोरम को संबोधित करेंगे और भारत मंडपम में इनोप्रोम प्रदर्शनी का दौरा भी करेंगे। भारत-रूस बातचीत का दायरा रक्षा और ऊर्जा से आगे बढ़ाकर उद्योग, संयुक्त कारोबार और स्थानीय मुद्रा में व्यापार जैसे क्षेत्रों तक ले जाने पर जोर रहने की उम्मीद है।

ब्रह्मोस से आगे नए क्षेत्रों में साझेदारी की तैयारी
भारत और रूस के बीच रक्षा सहयोग का लंबा इतिहास रहा है। ब्रह्मोस मिसाइल दोनों देशों की साझेदारी का प्रमुख उदाहरण है। अब सहयोग को दूसरे औद्योगिक क्षेत्रों तक ले जाने की संभावना भी दिखाई दे रही है।भारत की आरवीएनएल और रूस की टीएमएच के बीच वंदे भारत ट्रेनों के उत्पादन से जुड़ा सहयोग इसी दिशा में एक उदाहरण माना जा रहा है। इससे संकेत मिलता है कि भारत-रूस संबंधों में अब केवल रक्षा और तेल ही नहीं, बल्कि तकनीक और उद्योग भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।ऐसे में BRICS Summit 2026 भारत के लिए एक साथ कई मोर्चों पर महत्वपूर्ण है। एक तरफ शी जिनपिंग की भारत यात्रा से भारत-चीन आर्थिक संबंधों को नई दिशा मिलने की उम्मीद है, तो दूसरी तरफ पुतिन की मौजूदगी भारत-रूस सहयोग को नए क्षेत्रों में बढ़ाने का अवसर दे सकती है।

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