भिलाई। Nishaanebaz.com-Bhilai Digital Arrest Scam: छत्तीसगढ़ के भिलाई में करीब दो वर्ष पूर्व हुए हाई-प्रोफाइल ‘डिजिटल अरेस्ट’ (Digital Arrest) ठगी मामले में दुर्ग जिला पुलिस को बड़ी सफलता हाथ लगी है। साइबर ठगों के एक गिरोह ने एक निजी कंपनी के कर्मचारी को झांसे में लेकर होटल के कमरे में डिजिटल अरेस्ट किया था और डरा-धमकाकर विभिन्न म्यूल बैंक खातों में करीब 40 लाख रुपये ट्रांसफर करवा लिए थे। इस सनसनीखेज मामले में दुर्ग पुलिस ने अब राजस्थान से छठवें आरोपी रमेश सुथार (25 वर्ष) को गिरफ्तार कर लिया है।
मामला भिलाईनगर थाना क्षेत्र का है। पुलिस के अनुसार, साइबर ठगों ने फोन और वीडियो कॉल के माध्यम से पीड़ित कर्मचारी से संपर्क किया था। आरोपियों ने खुद को केंद्रीय जांच एजेंसी का वरिष्ठ अधिकारी बताकर पीड़ित पर गंभीर वित्तीय अपराधों में शामिल होने का झूठा आरोप लगाया और उसे कानूनी कार्रवाई का भारी डर दिखाया।
ठगों ने पीड़ित को लगातार डर के साए में रखते हुए किसी भी परिचित या परिजनों से संपर्क करने से रोक दिया और उसे एक होटल के कमरे में बंद कर डिजिटल अरेस्ट रखा। इस मानसिक दबाव के दौरान आरोपियों ने झांसा देकर पीड़ित के गाढ़े पसीने की कमाई के कुल 40 लाख रुपये अलग-अलग संदिग्ध (म्यूल) बैंक खातों में ट्रांसफर करवा लिए।
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक (SP) के निर्देश पर अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (ASP) मणिशंकर चंद्रा के मार्गदर्शन में भिलाईनगर पुलिस की एक विशेष साइबर टीम गठित की गई थी। पूर्व में पुलिस ने इस मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए पांच अन्य आरोपियों को सलाखों के पीछे भेजा था।
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गिरफ्तार पूर्व आरोपियों से कड़ाई से पूछताछ और तकनीकी साक्ष्यों (CDR व बैंक ट्रेल) के विश्लेषण के बाद राजस्थान के उदयपुर जिले की वल्लभनगर तहसील अंतर्गत ग्राम बना निवासी रमेश सुथार का नाम सामने आया। सुराग मिलते ही दुर्ग पुलिस की विशेष टीम ने राजस्थान में दबिश देकर रमेश सुथार को गिरफ्तार कर लिया, जिसे न्यायालय में प्रस्तुत करने के बाद न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया है।
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मामले की जानकारी देते हुए एएसपी मणिशंकर चंद्रा ने बताया कि साइबर अपराधी अब वीडियो कॉल के माध्यम से फर्जी जांच एजेंसियों के अधिकारी बनकर ‘डिजिटल अरेस्ट’ का नया तरीका अपना रहे हैं। उन्होंने आम नागरिकों से अपील की है कि कानून में डिजिटल अरेस्ट जैसा कोई प्रावधान नहीं है; अतः किसी भी धमकी या दबाव में आकर राशि ट्रांसफर न करें। यदि किसी के साथ ऐसी घटना होती है तो वह तुरंत राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर शिकायत दर्ज कराए।





