Political Controversy: नई दिल्ली। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने केंद्र सरकार पर दबाव बनाने और धमकियां देने के गंभीर आरोप लगाए हैं। मीडिया से बातचीत करते हुए उन्होंने दावा किया कि छात्र आंदोलनों के दौरान उन्हें बार-बार चेतावनियां दी गईं और एक राजनीतिक दल विशेष में शामिल होने के लिए उनके व उनके परिवार पर दबाव बनाया गया।
अभिजीत दीपके के इस बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में हलचल बढ़ गई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे किसी भी दबाव के आगे झुकने वाले नहीं हैं और छात्रों तथा लोकतंत्र के अधिकारों के लिए अपना संघर्ष जारी रखेंगे।
“बीजेपी में शामिल होने का बनाया गया दबाव”
अभिजीत दीपके ने आरोप लगाते हुए कहा कि छात्र प्रदर्शनों के दौरान उन्हें बार-बार धमकाया गया। उनके अनुसार, उनसे कहा गया कि यदि वे भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) में शामिल नहीं होते हैं, तो उनके परिवार को गंभीर मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है।
दीपके ने इस स्थिति पर दुख व्यक्त करते हुए कहा कि देश के शीर्ष पदों पर बैठे लोगों या उनके तंत्र द्वारा इस तरह की धमकियां दिया जाना लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है। उन्होंने इसे अत्यंत शर्मनाक करार दिया।
“शिक्षा और लोकतंत्र की रक्षा के लिए संघर्ष रहेगा जारी”
युवा पीढ़ी को गुमराह करने के आरोपों का जवाब देते हुए CJP संस्थापक ने कहा कि सरकार से सवाल पूछना किसी भी दृष्टिकोण से समाज को भ्रष्ट करना नहीं है।
उन्होंने जोर देकर कहा:
“अगर लोकतंत्र की रक्षा के लिए आवाज उठाना, सरकार की नीतियों पर सवाल खड़ा करना और छात्रों के भविष्य व शिक्षा के अधिकार के लिए लड़ना संस्कृति को भ्रष्ट करना माना जाता है, तो मैं इस संघर्ष को पीछे हटे बिना जारी रखूंगा।”
संसद चलो मार्च और गृह मंत्री के इस्तीफे की मांग
20 जुलाई को आयोजित ‘संसद चलो मार्च’ का जिक्र करते हुए दीपके ने आरोप लगाया कि प्रदर्शनकारी छात्रों पर बल प्रयोग का निर्देश केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के स्तर से ही आया होगा। पुलिस द्वारा छात्रों पर की गई कार्रवाई का विरोध करते हुए उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री के इस्तीफे की मांग की।
उन्होंने आगे कहा कि देश में लोकतांत्रिक व्यवस्थाएं दबाव में महसूस हो रही हैं और न्यायपालिका के समक्ष भी कई व्यावहारिक सवाल खड़े हो रहे हैं।
संवैधानिक संस्थाओं और विपक्षी दलों पर टिप्पणी
विपक्षी राजनीतिक दलों का उल्लेख करते हुए CJP प्रमुख ने आरोप लगाया कि केंद्रीय जांच एजेंसियों जैसे प्रवर्तन निदेशालय (ED) और सीबीआई का इस्तेमाल राजनीतिक दलों को कमजोर करने या विभाजित करने के लिए किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि शिवसेना और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) जैसे दलों के संदर्भ में देश ने इन स्थितियों को देखा है।
दीपके ने कहा कि देश की शीर्ष स्वायत्त संस्थाओं का दायित्व लोकतंत्र की मर्यादा बनाए रखना है, न कि किसी व्यवस्था में एकतरफा प्रभाव स्थापित होने देना। उन्होंने इस स्थिति का मुकाबला करने के लिए केवल राजनीतिक विपक्ष ही नहीं, बल्कि आम नागरिकों को भी एकजुट होने का आह्वान किया।
सरकारी नीतियों और निर्णयों पर उठाए सवाल
अपने वक्तव्य के अंतिम भाग में CJP संस्थापक ने केंद्रीय मंत्रियों और प्रशासनिक फैसलों पर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने शिक्षा मंत्रालय के नेतृत्व और फैसलों पर टिप्पणी करते हुए कहा कि वर्तमान व्यवस्था में नीतिगत संदेश सही नहीं जा रहे हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि पैरोल व्यवस्था और कानून-व्यवस्था के मामलों में कुछ निर्णयों से गलत संदेश समाज में जा रहा है, जो चिंताजनक है।
कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके के इन बयानों ने छात्र राजनीति और राष्ट्रीय मुद्दों को एक बार फिर चर्चा के केंद्र में ला दिया है। एक ओर जहां उन्होंने अपने आंदोलन को आगे बढ़ाने का संकल्प जताया है, वहीं दूसरी ओर सरकार और उसकी नीतियों पर तीखे सवाल दागे हैं। आने वाले दिनों में देखना होगा कि इन आरोपों पर सत्ता पक्ष की ओर से क्या प्रतिक्रिया आती है।







