Opposition Strategy & Ruckus: नई दिल्ली। संसद के मानसून सत्र के दौरान राज्यसभा में सार्वजनिक परीक्षा एवं पेपर लीक मुद्दे पर चर्चा के दौरान उस समय भारी हंगामा मच गया, जब विपक्ष के नेता और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने केंद्र सरकार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री पर सीधा व तीखा हमला बोला। खरगे ने आरोप लगाया कि परीक्षाओं में धांधली के खिलाफ आवाज उठा रहे देश के दूर-दराज के छात्रों पर सुरक्षा बलों के जरिए कठोरतम कार्रवाई की गई।
खरगे के इस भाषण के बाद सत्ता पक्ष (ट्रेजरी बेंच) के सांसदों ने कड़ा प्रतिवाद किया, जिससे सदन में काफी देर तक हंगामा और शोर-शराबा होता रहा।
“पैलेट गन का इस्तेमाल कर हाथ-पैर तोड़े, कौन है जिम्मेदार?”
राज्यसभा में बोलते हुए कांग्रेस अध्यक्ष ने बेहद आक्रामक रुख अपनाते हुए कहा:
“मेरे विद्यार्थी जो गांव-गांव से अपनी मेहनत के दम पर भविष्य बनाने आए थे, उन पर पैलेट गन का इस्तेमाल करके उन्हें मारा गया। उनके हाथ-पैर तोड़े गए। इस बर्बरता का जिम्मेदार आखिर कौन है? इसके जिम्मेदार देश के होम मिनिस्टर हैं। बंद कमरे में आप मेरी बात सुन रहे होंगे, लेकिन आप बहुत दिन छिपकर नहीं रह सकते। एक दिन हम जनता के सामने सब लाकर खड़ा करेंगे।”
“कानून में आंकड़े बदलने से नहीं, सिस्टम ऑपरेट करने से पड़ेगा फर्क”
संशोधन विधेयक की प्रभावशीलता पर सवाल उठाते हुए खरगे ने कहा कि सरकार ने केवल कुछ कागजी आंकड़े और कानूनी धाराएं बदली हैं, लेकिन इससे परीक्षा माफियाओं पर लगाम नहीं लगने वाली।
उन्होंने सवाल खड़ा किया:
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2024 में बदलाव क्यों नहीं?: जो संशोधन सरकार आज संसद में ला रही है, उन्हें वर्ष 2024 में ही क्यों नहीं लागू किया गया?
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राजनीतिक प्राथमिकता का आरोप: खरगे ने कहा कि उस समय केंद्र सरकार की प्राथमिकता युवाओं की समस्याओं को हल करना नहीं, बल्कि लोकसभा चुनाव की राजनीति करना था। उसी दौरान राहुल गांधी अपनी ‘भारत जोड़ो न्याय यात्रा’ में लगातार युवाओं के लिए पेपर लीक का मुद्दा उठा रहे थे, लेकिन सरकार ने उसे अनसुना किया।
“गुस्सा शांत करने और कुर्सी बचाने के लिए लाया गया बिल”
मल्लिकार्जुन खरगे ने दावा किया कि नया संशोधन कानून किसी भी दृष्टिकोण से भविष्य में पेपर लीक को पूरी तरह रोकने में सक्षम नहीं है।
उन्होंने कहा कि जब देश भर के छात्र सड़कों पर उतरे और सरकार ने युवाओं की संगठित ताकत तथा बढ़ते जनाक्रोश को देखा, तो उसे लगा कि यदि आंदोलन को नजरअंदाज किया गया तो भारी राजनीतिक नुकसान होगा। सरकार ने छात्रों की कुछ मांगें केवल इसलिए मानीं क्योंकि उसे अपनी कुर्सी बचाने की चिंता सता रही थी, न कि युवाओं के भविष्य की।
शीर्ष नेतृत्व के मौन और जेपी नड्डा पर साधा निशाना
भाषण के दौरान खरगे ने भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि अगर सरकार समय रहते संवेदनशीलता दिखाते हुए छात्रों से संवाद करने पहुंच जाती, तो इतने बड़े पैमाने पर छात्र घायल नहीं होते।
खरगे ने अंत में कहा कि देश की राजधानी दिल्ली में इतने बड़े स्तर पर घटनाएं हुईं, छात्र लाठियां खाते रहे, लेकिन प्रधानमंत्री और गृह मंत्री की तरफ से कोई स्पष्ट व सहनुभूतिपूर्ण प्रतिक्रिया नहीं आई। उन्होंने पूछा कि जब देश का युवा अपना हक मांग रहा था, तब सरकार उससे सीधे संवाद करने से पीछे क्यों हट गई?







