Thursday, September 17, 2026
Home Madhya Pradesh Barwani News Update: 97 दिन बाद सीएम हेल्पलाइन शिकायत ‘स्पेशल क्लोज’, शिकायतकर्ता...

Barwani News Update: 97 दिन बाद सीएम हेल्पलाइन शिकायत ‘स्पेशल क्लोज’, शिकायतकर्ता का आरोप— बिना पक्ष सुने बंद किया प्रकरण

Barwani News Update: बड़वानी (मध्य प्रदेश)। जिला मुख्यालय बड़वानी के एक निजी होटल में मंगलवार शाम आयोजित प्रेसवार्ता के दौरान प्रदेश की चर्चित ‘सीएम हेल्पलाइन’ (CM Helpline) प्रणाली की जांच प्रक्रिया और निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं। शिकायतकर्ता विनोद मुकाती ने बड़वानी पुलिस और विभागीय अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाते हुए बताया कि मुख्यमंत्री निवास के माध्यम से दर्ज कराई गई उनकी शिकायत को लगभग 97 दिनों तक लंबित रखने के बाद बिना उनका पक्ष सुने और बिना आपत्तियों का निराकरण किए “स्पेशल क्लोज” कर दिया गया। प्रेसवार्ता में विनोद मुकाती ने विभागीय जांच रिपोर्टों की प्रतियां मीडिया के समक्ष प्रस्तुत करते हुए पूरी प्रक्रिया को पक्षपातपूर्ण और लापरवाही से भरा करार दिया।

क्या था पूरा मामला? (शिकायत क्र. 37731976)

शिकायतकर्ता विनोद मुकाती के अनुसार, उन्होंने 13 अप्रैल 2026 को मुख्यमंत्री निवास एवं कार्यालय के माध्यम से सीएम हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज कराई थी।

  • शिकायत का विषय: यह शिकायत थाना बड़वानी में दर्ज अपराध क्रमांक 80/2026 की विवेचना में कथित तौर पर की जा रही देरी, प्रकरण को समय सीमा के भीतर न्यायालय में प्रस्तुत न करने तथा भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 119(1) एवं 119(2) के तहत अपेक्षित कार्रवाई न किए जाने से संबंधित थी।

  • प्रक्रिया का सफर: शिकायत दर्ज होने के बाद यह पहले एल-1 अधिकारी, फिर एल-2 अधिकारी और अंततः पुलिस अधीक्षक (SP) स्तर तक पहुंची। हालांकि, 19 जुलाई 2026 को इसे अचानक “स्पेशल क्लोज” कर बंद कर दिया गया।

नाम ‘वरुण’ लिखा और स्टाम्प वेंडर को बना दिया ‘वकील’

विनोद मुकाती ने प्रेसवार्ता में खुलासा करते हुए बताया कि जांच अधिकारियों ने रिपोर्ट तैयार करने में किस स्तर की लापरवाही बरती है:

  1. गलत नाम दर्ज होना: विभागीय रिपोर्ट में उनका वास्तविक नाम विनोद मुकाती होने के बावजूद कई स्थानों पर उन्हें “वरुण” दर्ज किया गया।

  2. गलत पेशा दर्शाना: मुकाती वर्तमान में पंजीयन एवं मुद्रांक विभाग में अधिकृत स्टाम्प वेंडर के रूप में कार्य करते हैं, लेकिन जांच रिपोर्ट में उनका पेशा “व्यवसायिक एडवोकेट” दर्शाया गया।

मुकाती ने कहा कि जब विभागीय रिपोर्ट में शिकायतकर्ता की मूल पहचान तक सही दर्ज नहीं है, तो इससे जांच अधिकारियों की संवेदनहीनता और लापरवाही साफ उजागर होती है।

“अंतिम रिपोर्ट में बदल दिए गए घटना के महत्वपूर्ण तथ्य”

मीडिया के सामने विभागीय रिपोर्टों की प्रतियां रखते हुए विनोद मुकाती ने दावा किया कि 19 मई 2026 और 8 जून 2026 को जारी की गई शुरुआती विभागीय रिपोर्टों में घटना का विवरण लगभग एक समान था।

लेकिन 19 जुलाई 2026 की अंतिम निराकरण रिपोर्ट में एकाएक कई महत्वपूर्ण तथ्यों का स्वरूप बदल दिया गया। उनका आरोप है कि अंतिम रिपोर्ट में घटना से जुड़े मुख्य बिंदुओं और पक्षकारों की स्थिति को इस तरह प्रस्तुत किया गया, जिससे पूरी विवेचना और जांच की निष्पक्षता पर ही प्रश्नचिह्न लग गया है।

शिकायतकर्ता विनोद मुकाती का कहना है कि 97 दिनों की लंबी प्रक्रिया के दौरान उन्हें एक बार भी अपना पक्ष रखने या साक्ष्य प्रस्तुत करने का अवसर नहीं दिया गया। उन्होंने शासन और वरिष्ठ अधिकारियों से पूरे मामले में हस्तक्षेप कर तथ्यों में फेरबदल करने वाले अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करने तथा प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।

Share The News

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here