MP Health News: सिंगरौली। सिंगरौली जिले में सरकारी अस्पतालों से मरीजों को निजी अस्पतालों तक पहुंचाने के कथित नेटवर्क पर अब प्रशासन ने सख्त रुख अपना लिया है। जिले की प्रभारी मंत्री एवं लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री संपतिया उईके ने अंतरविभागीय समीक्षा बैठक में स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि जिला चिकित्सालय और ट्रॉमा सेंटर में आने वाले मरीजों को बहला-फुसलाकर निजी अस्पतालों में ले जाने वाले निजी एम्बुलेंस चालकों के खिलाफ तत्काल एफआईआर दर्ज कर कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए। मंत्री के इस निर्देश को स्वास्थ्य व्यवस्था में व्याप्त अनियमितताओं पर बड़ी कार्रवाई के रूप में देखा जा रहा है।
बैठक में प्रभारी मंत्री ने कहा कि सरकारी अस्पतालों में आने वाले प्रत्येक मरीज को गुणवत्तापूर्ण और समय पर उपचार उपलब्ध कराना स्वास्थ्य विभाग की जिम्मेदारी है। यदि किसी निजी एम्बुलेंस चालक द्वारा मरीज या उसके परिजनों को गुमराह कर निजी अस्पतालों में भर्ती कराया जाता है तो ऐसे मामलों में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि ऐसे मामलों की निगरानी की जाए और दोषियों के खिलाफ तत्काल वैधानिक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने पर दिया जोर
MP Health News: समीक्षा बैठक के दौरान मंत्री संपतिया उईके ने स्वास्थ्य विभाग की विभिन्न योजनाओं और व्यवस्थाओं की विस्तार से समीक्षा की। उन्होंने प्रत्येक विकासखंड में नियमित स्वास्थ्य शिविर आयोजित करने, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में डॉक्टरों की उपलब्धता सुनिश्चित करने, जिला अस्पताल में ब्लड बैंक की व्यवस्था मजबूत करने, ऑर्थोपेडिक ऑपरेशन थिएटर शुरू करने तथा अन्य आवश्यक स्वास्थ्य सुविधाओं का तेजी से विस्तार करने के निर्देश दिए।उन्होंने कहा कि आम नागरिकों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकता है और इसमें किसी भी स्तर पर लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी।
डीएमएफ, पुनर्वास और विकास कार्यों को लेकर भी दिए निर्देश
MP Health News: बैठक में विस्थापित परिवारों के पुनर्वास, उद्योगों में स्थानीय लोगों को प्राथमिकता के आधार पर रोजगार उपलब्ध कराने और जिला खनिज प्रतिष्ठान (DMF) से स्वीकृत पुराने निर्माण कार्यों को पूरा किए बिना नए कार्यों को मंजूरी नहीं देने के निर्देश भी दिए गए।
इसके अलावा शिक्षा, कृषि, विद्युत, नगरीय विकास सहित कई विभागों की योजनाओं की समीक्षा की गई। नगर निगम को सड़क, नाली, स्ट्रीट लाइट और शॉपिंग प्लाजा से विस्थापित व्यापारियों से जुड़े मामलों की जांच कर 10 दिनों के भीतर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश भी दिए गए।
सिर्फ एम्बुलेंस चालक ही क्यों, डॉक्टरों की भूमिका पर भी उठे सवाल
MP Health News: प्रभारी मंत्री के निर्देशों के बाद जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर एक बड़ा सवाल भी चर्चा में है। लंबे समय से यह आरोप लगते रहे हैं कि कुछ सरकारी अस्पतालों से मरीजों को इलाज के नाम पर निजी अस्पतालों की ओर भेजा जाता है। आरोप यह भी हैं कि कुछ मामलों में सरकारी डॉक्टरों या अस्पताल से जुड़े कर्मचारियों द्वारा मरीजों को निजी संस्थानों में जाने की सलाह दी जाती है।
यही वजह है कि अब सवाल उठ रहे हैं कि यदि मरीजों को निजी अस्पतालों तक पहुंचाने की पूरी प्रक्रिया में किसी सरकारी चिकित्सक, स्वास्थ्यकर्मी या अन्य कर्मचारी की भूमिका सामने आती है तो क्या उनके खिलाफ भी निष्पक्ष जांच और कार्रवाई होगी, या फिर कार्रवाई केवल निजी एम्बुलेंस चालकों तक ही सीमित रहेगी।
जांच के बाद ही साफ होगी तस्वीर
MP Health News: फिलहाल सरकार ने निजी एम्बुलेंस चालकों पर कार्रवाई के स्पष्ट निर्देश दिए हैं, लेकिन स्वास्थ्य व्यवस्था से जुड़े जानकारों का मानना है कि यदि मरीजों को सरकारी अस्पताल से निजी अस्पताल भेजने के पूरे तंत्र की निष्पक्ष जांच होती है, तभी वास्तविक स्थिति सामने आएगी।हालांकि, सरकारी डॉक्टरों या अन्य कर्मचारियों की संलिप्तता संबंधी आरोपों की अभी तक आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। यदि जांच के दौरान किसी भी अधिकारी, चिकित्सक, कर्मचारी या निजी व्यक्ति की भूमिका सामने आती है, तो उसके विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है।स्वास्थ्य सेवाओं में पारदर्शिता और मरीजों के हितों की रक्षा को लेकर अब प्रशासन की अगली कार्रवाई पर जिलेभर की निगाहें टिकी हुई हैं।







