Illegal Clinic: टीकमगढ़: सरकारी भवन में झोलाछाप का क्लीनिक, रोशन सिंह ठाकुर बिना डिग्री के कर रहा इलाज, स्वास्थ्य विभाग बोला जांच होगी

Illegal Clinic: टीकमगढ़। मध्य प्रदेश के टीकमगढ़ जिले में ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्थाओं और सरकारी अमले की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करने वाला एक बेहद चौंकाने वाला मामला प्रकाश में आया है। जिले के विकासखंड के अंतर्गत आने वाले नादिया गांव में एक कथित झोलाछाप डॉक्टर रोशन सिंह ठाकुर पिछले कई सालों से बिना किसी वैध अनुमति, मान्यता और डिग्री के एक शासकीय (सरकारी) भवन के भीतर खुलेआम अपना क्लीनिक संचालित कर रहा है। सरकारी संपत्ति का इस तरह अवैध व्यावसायिक उपयोग और लोगों की जान के साथ हो रहे खिलवाड़ पर अब स्थानीय प्रशासन की नींद टूटी है।

बिना वैध मान्यता के गंभीर बीमारियों का इलाज, इंजेक्शन भी ठोक रहे

स्थानीय ग्रामीणों ने इस संबंध में गंभीर आरोप लगाते हुए बताया कि कथित डॉक्टर रोशन सिंह ठाकुर के पास चिकित्सा क्षेत्र की कोई भी वैध शैक्षणिक डिग्री नहीं है। इसके बावजूद वह क्षेत्र के भोले-भाले ग्रामीणों की मजबूरी का फायदा उठाकर रोजाना दर्जनों मरीजों का इलाज कर रहा है। इस अवैध क्लीनिक में उल्टी, दस्त, खांसी, बुखार जैसी मौसमी बीमारियों से लेकर अन्य कई गंभीर रोगों का भी उपचार किया जा रहा है। हैरान करने वाली बात यह है कि मरीजों को एलोपैथिक दवाइयां देने के साथ-साथ धड़ल्ले से इंजेक्शन भी लगाए जा रहे हैं और बोतलें (ड्रिप) चढ़ाई जा रही हैं। ग्रामीणों का कहना है कि बिना डिग्री के इस तरह के इलाज से गाँव में कभी भी कोई बड़ा और जानलेवा हादसा हो सकता है।

सबसे बड़ा यक्ष प्रश्न: आखिर सरकारी भवन में दुकान सजाने की परमिशन किसने दी?

इस पूरे मामले में सबसे बड़ा और गंभीर सवाल यह उठ रहा है कि आखिर एक पूर्णतः प्रतिबंधित और गैर-कानूनी झोलाछाप क्लीनिक को चलाने के लिए सरकारी भवन की चाबी और अनुमति किसने और किस सांठगांठ के तहत दी? ग्रामीणों के दावों के मुताबिक, यह क्लीनिक पिछले एक-दो महीने से नहीं बल्कि लंबे समय से इसी सरकारी परिसर में फल-फूल रहा है। ऐसे में यह बात भी संदेहास्पद है कि क्षेत्र के जिम्मेदार स्वास्थ्य अधिकारियों और स्थानीय प्रशासनिक अमले की नजर अब तक इस खुलेआम चल रहे अवैध कारोबार पर क्यों नहीं पड़ी?

ग्रामीण अंचलों में स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी का उठा रहे फायदा

टीकमगढ़ के सुदूर ग्रामीण इलाकों में पर्याप्त और सुलभ शासकीय स्वास्थ्य सुविधाओं की भारी कमी बनी हुई है। इसी लाचारी का अनुचित लाभ उठाकर ग्रामीण क्षेत्रों में झोलाछाप डॉक्टरों का यह अवैध धंधा पूरी तरह पैर पसार चुका है। बिना डिग्री और मान्यता के ये कथित डॉक्टर लोगों की स्वास्थ्य संबंधी मजबूरियों और जागरूकता के अभाव को अपना एक बड़ा व्यवसाय बना चुके हैं।

सीएमएचओ ने दिए जांच के कड़े निर्देश, टीम गठित

इस पूरे संवेदनशील मामले को लेकर जब मीडिया टीम ने टीकमगढ़ के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) डॉ. ओ.पी. अनुरागी से सीधा सवाल किया, तो उन्होंने मामले को गंभीरता से लिया। सीएमएचओ डॉ. अनुरागी ने कहा, “आपके द्वारा इस गंभीर मामले की जानकारी हमारे संज्ञान में लाई गई है। हम तत्काल एक विशेष डॉक्टरों की टीम का गठन कर नादिया गांव भेज रहे हैं। मामले की पूरी निष्पक्ष जांच कराकर उक्त कथित डॉक्टर के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।”

इस पूरे मामले के सामने आने के बाद खुद झोलाछाप डॉक्टर रोशन सिंह ठाकुर और स्थानीय ग्रामीण सीताराम लोधी ने भी मीडिया के समक्ष अपना-अपना पक्ष रखा है। बहरहाल, अब नादिया सहित पूरे जिले के नागरिकों की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि जिला स्वास्थ्य विभाग की टीम कब मौके पर पहुंचकर जांच की औपचारिकता पूरी करती है और इस सरकारी भवन से इस अवैध व जानलेवा क्लीनिक को कब तक हटाया जाता है।

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