Anganwadi Workers: रायपुर। छत्तीसगढ़ के महिला एवं बाल विकास विभाग ने व्यवस्थागत सुधार और पारदर्शिता की दिशा में एक अत्यंत महत्वपूर्ण और बड़ा प्रशासनिक निर्णय लिया है। बीते महीने में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं को वितरित की गई साड़ियों की गुणवत्ता (क्वालिटी) को लेकर हुई चौतरफा किरकिरी और विवादों के बाद विभाग ने अब केंद्रीकृत खरीदी व्यवस्था को पूरी तरह से समाप्त कर दिया है। अब विभाग द्वारा साड़ियों की सीधे खरीदी करने के बजाय इसके लिए निर्धारित तय राशि सीधे आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं एवं सहायिकाओं के व्यक्तिगत बैंक खातों में डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के माध्यम से जमा की जाएगी।
विवादों और सुझावों के कड़े परीक्षण के बाद संचालनालय स्तर से लिया गया फैसला
महिला एवं बाल विकास विभाग के संचालनालय स्तर पर पूर्व में होने वाली साड़ियों की सेंट्रलाइज्ड (केंद्रीकृत) टेंडर और खरीदी प्रक्रिया को लेकर हाल के दिनों में कई गंभीर मुद्दे और शिकायतें सामने आई थीं। विभाग के उच्चाधिकारियों ने प्राप्त शिकायतों और विभिन्न कर्मचारी संगठनों से मिले व्यावहारिक सुझावों का गंभीरता से परीक्षण किया। इसके बाद इस पारदर्शी व्यवस्था को लागू करने का निर्णय लिया गया। विभाग का मानना है कि इस कदम से न केवल पूरी व्यवस्था में वित्तीय पारदर्शिता सुनिश्चित होगी, बल्कि मैदानी स्तर पर काम करने वाली आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं एवं सहायिकाओं को अपनी सुविधा, पसंद और शारीरिक आवश्यकता के अनुरूप साड़ी का कपड़ा चयन करने की पूरी स्वतंत्रता भी मिल सकेगी।
रंग और डिजाइन में रहेगी पूरे प्रदेश में एकरूपता, वेबसाइट पर अपलोड होगा प्रारूप
विभागीय मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े ने इस संबंध में विभाग के आला अफसरों को कड़े दिशा-निर्देश जारी किए हैं। मंत्री ने निर्देशित किया है कि साड़ियों का मूल वैचारिक डिज़ाइन पूर्व की भांति ही रखा जाए तथा इसके अंतिम स्वरूप को अंतिम रूप देने से पहले आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं एवं सहायिकाओं के प्रतिनिधियों से आवश्यक परामर्श व चर्चा की जाए। पूरे प्रदेश में विभागीय पहचान और एकरूपता बनाए रखने के उद्देश्य से साड़ी का आधिकारिक रंग एवं स्वीकृत डिज़ाइन विभागीय स्तर पर तय किया जाएगा और उसकी स्पष्ट जानकारी व तस्वीरें विभाग की आधिकारिक वेबसाइट पर सार्वजनिक रूप से उपलब्ध कराई जाएंगी।
कपड़े का प्रकार खुद चुन सकेंगी कार्यकर्ता, केंद्र सरकार की योजना में ₹500 का प्रावधान
मंत्री के निर्देशों के अनुसार, साड़ी की डिजाइन और रंग विभागीय गाइडलाइन के अनुसार तय रहेंगे, लेकिन साड़ी के कपड़े (फैब्रिक) जैसे— कॉटन, सिंथेटिक या अन्य आरामदायक विकल्पों का चयन स्थानीय स्तर पर स्वयं कार्यकर्ता एवं सहायिकाएं अपनी सुविधा के अनुसार कर सकेंगी। उल्लेखनीय है कि भारत सरकार की बाल विकास सेवा योजना (ICDS) के दिशा-निर्देशों के अंतर्गत आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं को उनकी विशिष्ट पहचान और एकरूपता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से प्रतिवर्ष दो सेट यूनिफॉर्म (साड़ी) प्रदान करने का वैधानिक प्रावधान है। इस योजना के तहत वर्तमान नियमों में प्रति यूनिफॉर्म अधिकतम 500 रुपये की राशि की स्वीकृति दी गई है, जो अब सीधे संबंधित कर्मचारियों के खातों में अंतरित होगी।






