MP IAS Transfer: एमपी आईएएस ट्रांसफर खबर में मध्यप्रदेश सरकार के एक अहम फैसले ने प्रशासनिक गलियारों में हलचल बढ़ा दी है। सरकार ने उन चार आईएएस अधिकारियों के भी तबादले कर दिए हैं, जिन्होंने पहले से प्रतिनियुक्ति पर जाने के लिए आवेदन किया हुआ था। इन अधिकारियों में IAS दंपती रोहित सिंह और हर्षिका सिंह का नाम भी शामिल है।
सूत्रों के अनुसार एमपी आईएएस ट्रांसफर खबर में सामने आया है कि उच्च स्तर पर यह तय किया गया है कि प्रतिनियुक्ति के उन मामलों को प्राथमिकता दी जाएगी, जिनमें अधिकारी केंद्र सरकार के मंत्रालयों में पदस्थ होने वाले हैं।वहीं ऐसे संस्थान या अकादमियां, जहां अधिकारियों की प्रतिनियुक्ति से प्रदेश को प्रत्यक्ष लाभ नहीं मिलता, वहां से रिलीव करने की प्रक्रिया में जल्दबाजी नहीं की जाएगी।
केंद्र सरकार की नीति से जुड़ा है मामला
एमपी आईएएस ट्रांसफर खबर के अनुसार केंद्र सरकार ने साल 2020 में इंपैनलमेंट नीति में बदलाव किया था। नई व्यवस्था के तहत वर्ष 2007 और उसके बाद के बैच के आईएएस अधिकारियों के लिए केंद्र सरकार में प्रतिनियुक्ति को पदोन्नति की प्रक्रिया से जोड़ा गया है।इसी वजह से कई अधिकारी केंद्र सरकार में सेवाएं देने के लिए प्रतिनियुक्ति का विकल्प चुन रहे हैं।
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इन IAS अधिकारियों ने किया प्रतिनियुक्ति के लिए आवेदन
2011 बैच – सौरव कुमार सुमन
एमपी आईएएस ट्रांसफर खबर के तहत सौरव कुमार सुमन को पिछड़ा वर्ग निगम से स्थानांतरित कर उद्यानिकी विभाग भेजा गया है। उन्होंने प्रतिनियुक्ति के लिए पहले ही आवेदन कर रखा है।
2012 बैच – रोहित सिंह
रोहित सिंह वित्त विभाग में अपर सचिव के पद पर कार्यरत थे। अब उन्हें मध्यप्रदेश पाठ्य पुस्तक निगम का प्रबंध संचालक (MD) बनाया गया है। उन्होंने एक अकादमी में प्रतिनियुक्ति के लिए आवेदन किया है।
2012 बैच – हर्षिका सिंह
हर्षिका सिंह पहले ग्रामीण आजीविका मिशन में संचालक पद पर थीं। अब उन्हें बजट संचालनालय में संचालक की जिम्मेदारी दी गई है। उन्होंने भी अकादमी में प्रतिनियुक्ति के लिए आवेदन किया है।
2013 बैच – अमनबीर सिंह बैंस
अमनबीर सिंह बैंस को ऊर्जा विकास निगम से स्थानांतरित कर ट्रेजरी आयुक्त बनाया गया है। उन्होंने लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी (LBSNAA) में प्रतिनियुक्ति के लिए आवेदन किया है।
सरकार के फैसले के क्या हैं मायने?
एमपी आईएएस ट्रांसफर खबर से यह संकेत मिलता है कि राज्य सरकार फिलहाल उन अधिकारियों की प्रतिनियुक्ति को प्राथमिकता दे रही है, जिनकी नियुक्ति सीधे केंद्र सरकार के मंत्रालयों में होनी है। वहीं अकादमियों और अन्य संस्थानों में जाने वाले अधिकारियों को फिलहाल अपने नए दायित्वों का निर्वहन करना पड़ सकता है।









