Jashpur Land Scam: ट्रांसफर के बाद भी ‘भूत’ ने की 33 रजिस्ट्रियां! पत्थलगांव राजस्व विभाग में बड़ा डिजिटल फर्जीवाड़ा

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Jashpur Land Scam: गौरी शंकर गुप्ता/जशपुर/पत्थलगांव: छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले के पत्थलगांव राजस्व विभाग से सुशासन के दावों के बीच एक बेहद हैरान करने वाला और गंभीर डिजिटल फर्जीवाड़ा सामने आया है। यहाँ पत्थलगांव के पूर्व तहसीलदार प्रांजल मिश्रा का तबादला होने और उनके कार्यमुक्त (Relieve) होने के बाद भी उनकी डिजिटल लॉग-इन आईडी और डिजिटल दस्तखत (Digital Signature) का इस्तेमाल कर बैक-डेट में धड़ाधड़ 33 जमीनों की रजिस्ट्रियां और नामांतरण निपटा दिए गए। इस पूरे मामले के उजागर होने के बाद जहां राजस्व विभाग में हड़कंप मच गया है, वहीं भू-माफिया और अधिकारियों की साठ-गांठ को लेकर स्थानीय आदिवासियों में भारी आक्रोश व्याप्त है।

4 दिनों के भीतर रची गई ‘डिजिटल डकैती’ की पूरी क्रोनोलॉजी

प्राप्त जानकारी के अनुसार, पूर्व तहसीलदार प्रांजल मिश्रा को 9 तारीख को पत्थलगांव से ट्रांसफर कर बकायदा कार्यमुक्त कर दिया गया था। नियमतः कार्यमुक्त होने के बाद उनकी वित्तीय और प्रशासनिक शक्तियां समाप्त हो जाती हैं, लेकिन 9 से 13 तारीख के बीच उनकी शासकीय आईडी का अवैध रूप से उपयोग किया गया। इस 4 दिनों के ‘ओवरटाइम’ के दौरान चिड़ापारा स्थित एक आदिवासी परिवार (लुईस जाति उरांव) के नाम वर्ष 1956 से दर्ज बेशकीमती भूमि (खसरा नंबर 333/1, रकबा 1.052 हेक्टेयर) को नियम विरुद्ध तरीके से सामान्य घोषित कर दिया गया। इसके बाद जमीन के टुकड़े (333/5 और 333/8) कर गैर-आदिवासियों और धनाढ्य व्यापारियों के नाम रजिस्ट्री कर दी गई।

एसडीएम, तहसीलदार और पटवारी पर साठ-गांठ के आरोप

पीड़ित पक्ष की ओर से आवेदिका सुचिता एक्का ने 17 जून 2026 को सारे पुख्ता और डिजिटल दस्तावेजों के साथ जशपुर कलेक्टर के समक्ष एक विस्तृत शिकायती पत्र प्रस्तुत किया है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि इस पूरे खेल में एसडीएम ऋतुराज सिंह बिसेन, पूर्व तहसीलदार प्रांजल मिश्रा, तत्कालीन तहसीलदार उमा सिंह, पूर्व पटवारी मदन भगत, वर्तमान पटवारी रविनारायण राठिया और भू-माफिया सुरेश यादव की कथित संलिप्तता है। गंभीर शिकायत के बाद भी जिला प्रशासन द्वारा अब तक रजिस्ट्रियों पर स्टे न लगाने या त्वरित जांच दल न गठित करने पर क्षेत्र की जनता ने प्रशासन की निष्पक्षता पर सवाल उठाए हैं।

सर्व आदिवासी समाज ने दी उग्र आंदोलन की चेतावनी

यह मामला इसलिए भी तूल पकड़ रहा है क्योंकि छत्तीसगढ़ में वर्तमान में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की सरकार है, जो स्वयं इसी जशपुर अंचल से आते हैं और आदिवासी समाज का प्रतिनिधित्व करते हैं। ऐसे में आदिवासियों की पैतृक जमीन पर सरेआम डाका डालना सरकार के ‘सुशासन’ के दावों पर सवाल खड़े कर रहा है। सर्व आदिवासी समाज ने जिला प्रशासन को स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि इन 33 ‘भूतिया’ रजिस्ट्रियों को तत्काल शून्य घोषित नहीं किया गया और दोषी अधिकारियों पर डिजिटल जालसाजी की एफआईआर (FIR) दर्ज नहीं हुई, तो पूरे जशपुर जिले में उग्र चक्काजाम और उग्र आंदोलन किया जाएगा।

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