CG News: बिलासपुर में सर्पदंश मुआवजा योजना में बड़ा घोटाला! डॉक्टर-वकीलों की मिलीभगत का खुलासा

Rahul Goshwami

Bilaspur Snakebite Compensation Scam: बिलासपुर सर्पदंश मुआवजा घोटाला छत्तीसगढ़ की सरकारी योजनाओं में पारदर्शिता को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। जिले में हुई जांच में खुलासा हुआ है कि कुछ मामलों में जहर सेवन और अन्य कारणों से हुई मौतों को सर्पदंश से हुई मौत बताकर सरकारी मुआवजा प्राप्त किया गया। प्रारंभिक जांच में डॉक्टरों, वकीलों और अन्य लोगों की संदिग्ध भूमिका सामने आई है।

बिलासपुर सर्पदंश मुआवजा घोटाला की जांच के दौरान अब तक 17 संदिग्ध मामलों की पुष्टि हुई है। जांच रिपोर्ट के अनुसार फर्जी दस्तावेज, पोस्टमार्टम रिपोर्ट और गलत मेडिकल रिकॉर्ड के आधार पर करीब 60 लाख रुपये की मुआवजा राशि हासिल की गई। प्रशासन 15 से अधिक मामलों में एफआईआर दर्ज कराने की तैयारी कर रहा है।

विधानसभा में उठे सवाल के बाद शुरू हुई जांच
बिलासपुर सर्पदंश मुआवजा घोटाला उस समय चर्चा में आया जब बेलतरा विधायक सुशांत शुक्ला ने इस मुद्दे को विधानसभा में उठाया। शिकायत के बाद कराई गई जांच में एक संगठित फर्जीवाड़े के संकेत मिले। अधिकारियों का मानना है कि जांच आगे बढ़ने के साथ घोटाले की वास्तविक रकम और इसमें शामिल लोगों की संख्या बढ़ सकती है।
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डॉक्टर, दलाल और अन्य लोगों का नेटवर्क आया सामने
बिलासपुर सर्पदंश मुआवजा घोटाला की जांच में सामने आया कि कुछ मामलों में दलालों का एक नेटवर्क सक्रिय था। आरोप है कि यह नेटवर्क डॉक्टरों, जांच अधिकारियों और कानूनी सलाहकारों के साथ मिलकर ऐसे दस्तावेज तैयार करता था, जिनमें मौत का कारण सर्पदंश बताया जाता था। इन्हीं दस्तावेजों के आधार पर प्रशासन से मुआवजे की मांग की जाती थी।

बिलासपुर के आंकड़ों ने बढ़ाया संदेह
बिलासपुर सर्पदंश मुआवजा घोटाला की जांच में आंकड़ों का अंतर भी महत्वपूर्ण कारण बना। जशपुर जिले में सर्पदंश से 96 मौतों पर करीब 3 करोड़ रुपये का मुआवजा दिया गया, जबकि अकेले बिलासपुर में 431 सर्पदंश मौतों के नाम पर 17 करोड़ रुपये से अधिक की राशि वितरित की गई। इस असामान्य अंतर के बाद विस्तृत जांच शुरू की गई।

रिकॉर्ड और पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मिली गड़बड़ियां
बिलासपुर सर्पदंश मुआवजा घोटाला में कई ऐसे मामले मिले हैं, जिनमें अस्पताल में भर्ती होने के रिकॉर्ड, इलाज संबंधी दस्तावेज और पोस्टमार्टम रिपोर्ट संदिग्ध पाई गईं। कई मामलों में वास्तविक मौत का कारण जहर सेवन बताया गया, लेकिन सरकारी रिकॉर्ड में उसे सर्पदंश से मौत दर्शाया गया था।

दोषियों पर होगी सख्त कार्रवाई
बिलासपुर सर्पदंश मुआवजा घोटाला की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन अब दोषियों के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई की तैयारी कर रहा है। पूर्व नेता प्रतिपक्ष धरमलाल कौशिक ने भी इस मामले में पहले सवाल उठाए थे और सुझाव दिया था कि मुआवजा केवल प्रमाणित पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर दिया जाना चाहिए। आने वाले दिनों में इस मामले में कई और बड़े खुलासे होने की संभावना है।

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