Kapu Murder Case: गौरी शंकर गुप्ता/रायगढ़। रायगढ़ के माननीय अपर सत्र न्यायालय ने पारिवारिक विवाद के चलते अपने ही साले की सरेआम चाकू घोंपकर निर्मम हत्या करने वाले पाशविक प्रवृत्ति के आरोपी को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास (उम्रकैद) की कठोर सजा सुनाई है। अपर सत्र न्यायाधीश श्रीमान अभिषेक शर्मा ने मामले की अंतिम सुनवाई करते हुए आरोपी दाता राम सारथी को भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 302 (हत्या) के तहत दोषी पाया। न्यायालय ने कारावास के साथ-साथ आरोपी पर ₹1000 का अर्थदंड भी अधिरोपित किया है। इसके साथ ही, कोर्ट ने मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए मृतक के बेसहारा आश्रित परिवार को जिला विधिक सेवा प्राधिकरण रायगढ़ के माध्यम से ₹1,00,000 (एक लाख रुपये) की आर्थिक क्षतिपूर्ति राशि दिलाए जाने की एक बेहद महत्वपूर्ण अनुशंसा भी की है। इस पूरे मामले में शासन की ओर से अपर लोक अभियोजक राजेश सिंह ठाकुर ने बेहद प्रभावी और अकाट्य पैरवी की।
दूधमुंहे बच्चे को छीनकर भाग रहा था आरोपी
अभियोजन पक्ष द्वारा प्रस्तुत किए गए अदालती दस्तावेजों और थाना कापू के अपराध क्रमांक 58/2026 के रिकॉर्ड के अनुसार, यह पूरा खूनी घटनाक्रम दिनांक 1 मई 2022 का है। आरोपी दाता राम सारथी (निवासी मुनुन्द) का विवाह उर्मिला सारथी के साथ संपन्न हुआ था। विवाह के कुछ समय बाद ही दोनों पति-पत्नी के बीच आपसी संबंध खराब होने लगे, जिसके चलते उर्मिला अक्सर अपने मायके ग्राम पत्थलगांव खुर्द (थाना कापू) में आकर रहने लगी थी। घटना के कुछ समय पूर्व जब वह मायके आई थी, तब वह पूर्ण रूप से गर्भवती थी। मायके में ही उसने एक सुंदर पुत्र को जन्म दिया। घटना के दिन बच्चा मात्र एक वर्ष का दूधमुंहा शिशु था। 1 मई 2022 की शाम करीब चार बजे आरोपी दाता राम सारथी अचानक अपने ससुराल पत्थलगांव खुर्द धमका। वहां उसने बिना किसी ठोस कारण के अपनी पत्नी उर्मिला से उस मासूम बच्चे को जबरन छीन लिया और वहां से भागने लगा।
आंखों के सामने भाई को उतारा मौत के घाट, साक्ष्यों ने दिलाई सजा
मासूम बच्चे को इस तरह जबरन ले जाते देख पत्नी उर्मिला सारथी, उसकी भाभी और भतीजी ने सामने आकर आरोपी दाता राम को रोकने का पुरजोर प्रयास किया। लेकिन वह नहीं माना और बच्चे को लेकर मुख्य मार्ग (मेन रोड) की तरफ दौड़ पड़ा। इसी बीच चीख-पुकार सुनकर उर्मिला का बड़ा भाई महेश सारथी (अब मृत) वहां पहुंचा। उसने बीच-बचाव करते हुए अपनी बहन के दूधमुंहे बच्चे को इस तरह ले जाने से मना किया। इस बात पर आरोपी दाता राम सारथी अचानक आगबबूला हो गया और उसने अपने पास छिपाकर रखे धारदार चाकू से महेश सारथी के पेट, पीठ और गर्दन पर ताबड़तोड़ कई जानलेवा वार कर दिए। हमले की भयावहता इतनी अधिक थी कि महेश सारथी की मौके पर ही तड़प-तड़प कर दर्दनाक मृत्यु हो गई। आरोपी ने इस जघन्य हत्याकांड को मृतक की पत्नी, बहन और मासूम पुत्री की आंखों के ठीक सामने अंजाम दिया था।
हादसे के बाद मृतक की रोती-बिलखती पत्नी कुसुम सारथी ने तत्काल कापू थाने पहुंचकर मामले की लिखित रिपोर्ट दर्ज कराई। घटना की गंभीरता को देखते हुए तत्कालीन विवेचना अधिकारी (IO) रमा शंकर तिवारी ने मामले की कमान संभाली। उन्होंने तत्परता दिखाते हुए घटनास्थल से भौतिक व वैज्ञानिक साक्ष्य संकलित किए, चश्मदीद गवाहों के बयान दर्ज किए और आरोपी को गिरफ्तार कर उसके खिलाफ धारा 302 भादवि के तहत मजबूत चार्जशीट न्यायालय में प्रस्तुत की। माननीय अदालत ने सभी गवाहों के बयानों, चिकित्सीय रिपोर्ट और दोनों पक्षों की अंतिम बहस को सुनने के बाद यह पाया कि आरोपी का कृत्य अत्यंत क्रूर और अक्षम्य था, जिसके आधार पर उसे उम्रकैद की सजा से दंडित किया गया।









