Chhattisgarh Scam Investigation: रायपुर। छत्तीसगढ़ में पिछले पांच-छह वर्षों के दौरान सामने आए आठ बड़े कथित घोटालों ने भ्रष्टाचार के बड़े नेटवर्क की ओर इशारा किया है। कोल लेवी, शराब, डीएमएफ, महादेव सट्टा, सीजीएमएससी, कस्टम मिलिंग, भारतमाला और सीजीपीएससी से जुड़े मामलों में कुल 10,933 करोड़ रुपये की कथित अनियमितताओं की जांच विभिन्न एजेंसियां कर रही हैं।
Chhattisgarh Scam Investigation: इन मामलों की जांच आयकर विभाग (IT), प्रवर्तन निदेशालय (ED), आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (EOW), एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) और सीबीआई जैसी एजेंसियां कर रही हैं। अब तक लगभग 5,378 करोड़ रुपये की चल और अचल संपत्तियां अटैच की जा चुकी हैं। इनमें आईएएस और राज्य प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों, कारोबारियों तथा अन्य प्रभावशाली लोगों से जुड़ी संपत्तियां शामिल हैं।
Chhattisgarh Scam Investigation: कानूनी प्रक्रिया के तहत अटैच की गई संपत्तियों का उपयोग किया जा सकता है, लेकिन उन्हें बेचना, हस्तांतरित करना, गिरवी रखना या उन पर नया निर्माण करना प्रतिबंधित रहता है। यदि अदालत में आरोप सिद्ध हो जाते हैं तो इन संपत्तियों का राजसात कर सरकार के अधिकार में लिया जा सकता है और बाद में उनकी नीलामी कर राशि सरकारी खजाने में जमा की जाती है।
Chhattisgarh Scam Investigation: कानून विशेषज्ञों के अनुसार, जांच एजेंसियां किसी भी घोटाले की जांच के दौरान आय के स्रोत और कथित अवैध कमाई से खरीदी गई संपत्तियों की जानकारी जुटाती हैं। यदि संपत्ति अवैध आय से अर्जित होने का संदेह होता है तो उसे अस्थायी रूप से अटैच किया जाता है। संपत्ति का मालिक अदालत में वैध आय या पैतृक संपत्ति होने के दस्तावेज पेश कर अटैचमेंट हटाने की मांग कर सकता है।
Chhattisgarh Scam Investigation: पिछले वर्षों में सामने आए प्रमुख कथित घोटालों में शराब घोटाले में लगभग 3,200 करोड़ रुपये, कोल लेवी में 540 करोड़ रुपये, डीएमएफ में 575 करोड़ रुपये, सीजीएमएससी खरीद में 411 करोड़ रुपये, कस्टम मिलिंग में 175 करोड़ रुपये, भारतमाला परियोजना में 75 करोड़ रुपये और महादेव ऑनलाइन सट्टा मामले में करीब 6,000 करोड़ रुपये की कथित अनियमितताओं के आरोप शामिल हैं। वहीं सीजीपीएससी भर्ती प्रक्रिया में भी चयन में अनियमितताओं के आरोपों की जांच जारी है।
Chhattisgarh Scam Investigation: संपत्ति अटैचमेंट की प्रक्रिया के तहत ईडी पहले अस्थायी अटैचमेंट करती है और फिर 30 दिनों के भीतर मामला नई दिल्ली स्थित एडजुडिकेटिंग अथॉरिटी के समक्ष भेजती है। इसके फैसले के खिलाफ पहले पीएमएलए अपीलीय न्यायाधिकरण, फिर संबंधित हाईकोर्ट और अंत में सुप्रीम कोर्ट में अपील की जा सकती है। मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े मामलों की सुनवाई रायपुर की विशेष पीएमएलए अदालत में होती है, जबकि एसीबी और ईओडब्ल्यू के मामलों की सुनवाई विशेष अदालत में की जाती है।
Chhattisgarh Scam Investigation: जांच एजेंसियों ने विभिन्न मामलों में कई प्रमुख आरोपियों की संपत्तियां अटैच की हैं। महादेव सट्टा मामले में सौरभ चंद्राकर, विकास गर्ग, हरिशंकर तिबरेवाल और रवि उप्पल की संपत्तियां अटैच की गई हैं। कोल लेवी मामले में सूर्यकांत तिवारी, सौम्या चौरसिया, रानू साहू और समीर विश्नोई से जुड़ी संपत्तियां कार्रवाई के दायरे में हैं। शराब घोटाले में अनिल टुटेजा, एपी त्रिपाठी, अनवर ढेबर और विकास अग्रवाल की संपत्तियां अटैच की गई हैं। इसके अलावा भारतमाला, डीएमएफ, सीजीएमएससी और कस्टम मिलिंग मामलों में भी कई अधिकारियों और कारोबारियों की संपत्तियों पर एजेंसियों ने कार्रवाई की है।







