Modamsilli Dam Dhamtari: धमतरी/रायपुर; 02 जून 2026। छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले के सुप्रसिद्ध मॉडमसिल्ली बांध क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले 34 गांवों के जनजातीय (आदिवासी) समाज और अन्य समाज के ग्रामीणों ने जल-जंगल-जमीन और अपने पारंपरिक आजीविका के अधिकारों को लेकर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। बांध क्षेत्र में साल 2016 से संचालित हो रही बाहरी मत्स्य ठेका व्यवस्था को पूरी तरह से निरस्त करने और आगामी 9 जून को प्रस्तावित नए टेंडर की प्रक्रिया को तुरंत रद्द करने की मांग को लेकर प्रभावित ग्रामीणों के एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने माननीय मत्स्य पालन मंत्री श्री रामविचार नेताम से मुलाकात की और उन्हें अपनी मांगों का एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा।

आदिवासी नेता खूबलाल ध्रुव के नेतृत्व में मिला प्रतिनिधिमंडल; स्थानीय हितों को प्राथमिकता देने की मांग
यह महत्वपूर्ण मुलाकात क्षेत्र के प्रखर आदिवासी नेता और जनसेवक खूबलाल ध्रुव के नेतृत्व में राजधानी रायपुर में संपन्न हुई। मंत्री रामविचार नेताम को सौंपे गए ज्ञापन में प्रतिनिधिमंडल ने क्षेत्र की जमीनी और गंभीर समस्याओं से अवगत कराया। खूबलाल ध्रुव ने मंत्री जी के समक्ष पुरजोर तरीके से बात रखते हुए कहा कि मॉडमसिल्ली बांध क्षेत्र के स्थानीय जनजातीय और ग्रामीण परिवारों के हितों को किसी भी सरकारी नीति में सर्वोच्च प्राथमिकता दी जानी चाहिए। उन्होंने तर्क दिया कि बांध के निर्माण और जल भराव के कारण स्थानीय लोगों की जमीनों और आजीविका पर असर पड़ा है, इसलिए नियमानुसार इस जलाशय में मत्स्य पालन और मछली पकड़ने का पहला और वास्तविक हक केवल और केवल स्थानीय ग्रामीणों व मछुआरा सहकारी समितियों का ही होना चाहिए, न कि किसी बाहरी बड़े ठेकेदार का।
मत्स्य मंत्री ने दिया नियमानुसार उचित कार्रवाई का भरोसा
प्रतिनिधिमंडल में शामिल ग्रामीणों ने मंत्री जी को बताया कि साल 2016 से लागू की गई ठेका व्यवस्था के कारण स्थानीय आदिवासियों और अन्य समाज के लोगों को रोजगार से महरूम होना पड़ रहा है। यदि आगामी 9 जून को होने वाली टेंडर प्रक्रिया को रोका नहीं गया, तो स्थानीय युवाओं में असंतोष और अधिक गहरा जाएगा। माननीय मत्स्य मंत्री श्री रामविचार नेताम ने प्रतिनिधिमंडल की सभी बातों और चिंताओं को बेहद गंभीरता और संवेदनशीलता के साथ सुना। उन्होंने आदिवासी समाज के हितों की रक्षा करने की सरकार की प्रतिबद्धता को दोहराते हुए ग्रामीणों को आश्वस्त किया कि इस पूरे मामले की बारीकी से समीक्षा की जाएगी और विभागीय नियमों के दायरे में रहते हुए स्थानीय लोगों के हित में उचित व त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। मंत्री जी के सकारात्मक आश्वासन के बाद ग्रामीणों ने उम्मीद जताई है कि सरकार स्थानीय आदिवासियों के हक में फैसला लेगी।









