Damoh Pension KYC Case : दमोह पेंशन KYC मामला मध्य प्रदेश की व्यवस्था पर बड़े सवाल खड़े कर रहा है। नौतपा की भीषण गर्मी के बीच दमोह जिले की 82 साल की शोभारानी अपनी बंद पेंशन शुरू कराने के लिए 45 किलोमीटर दूर जनपद कार्यालय पहुंचीं।तापमान 45 डिग्री के पार था। सड़कें तप रही थीं, लेकिन बुजुर्ग महिला के कदम नहीं रुके। वजह सिर्फ एक थी—पिछले एक साल से बंद पड़ी पेंशन।
दमोह पेंशन KYC मामला में बताया जा रहा है कि शोभारानी की पेंशन पिछले 12 महीने से KYC नहीं होने के कारण बंद पड़ी है।दमोह जिले के बटियागढ़ ब्लॉक के भिलौनी गांव की रहने वाली शोभारानी कई बार पंचायत स्तर पर मदद मांग चुकी थीं, लेकिन उनकी समस्या का समाधान नहीं हुआ। आखिरकार उन्हें खुद जनपद कार्यालय जाने का फैसला लेना पड़ा।
भतीजे ने पहनाए अपने जूते
दमोह पेंशन KYC मामला उस समय और भावुक हो गया जब रास्ते में बुजुर्ग महिला के पैर गर्म सड़क पर जलने लगे।उनके भतीजे ओमप्रकाश विश्वकर्मा ने अपने जूते उतारकर शोभारानी को पहनाए और खुद नंगे पैर चलते रहे। परिवार के पास बस का किराया तक नहीं था, इसलिए दोनों पैदल ही निकल पड़े।यह दृश्य देखकर रास्ते में कई लोग भावुक हो गए।
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पंचायत में नहीं सुनी गई शिकायत
दमोह पेंशन KYC मामला में परिवार का आरोप है कि पंचायत स्तर पर उनकी कोई सुनवाई नहीं हुई।ओमप्रकाश का कहना है कि उन्होंने कई बार सरपंच और सचिव से पेंशन चालू कराने की गुहार लगाई, लेकिन हर बार उन्हें टाल दिया गया। मजबूरी में उन्हें इतनी गर्मी में जनपद कार्यालय तक आना पड़ा।
कलेक्टर के आदेश के बाद भी नहीं हुई व्यवस्था
दमोह पेंशन KYC मामला अब प्रशासनिक लापरवाही का बड़ा उदाहरण बनता जा रहा है। बताया जा रहा है कि कलेक्टर प्रताप नारायण यादव ने पंचायत स्तर पर KYC की व्यवस्था करने के निर्देश दिए थे।इसके बावजूद गांवों में सही व्यवस्था नहीं हो सकी। इसका खामियाजा एक 82 साल की महिला को भुगतना पड़ा।
सरकारी दावों पर उठे सवाल
दमोह पेंशन KYC मामला ने सरकारी योजनाओं और शिविरों के दावों पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।एक तरफ KYC अभियान के नाम पर गांव-गांव शिविर लगाने और करोड़ों रुपए खर्च करने के दावे किए जाते हैं, वहीं दूसरी तरफ बुजुर्ग महिलाओं को पेंशन के लिए तपती सड़कों पर भटकना पड़ रहा है।
क्या जिम्मेदारों पर होगी कार्रवाई?
दमोह पेंशन KYC मामला अब सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। लोग सवाल पूछ रहे हैं कि आखिर एक बुजुर्ग महिला को इतनी तकलीफ क्यों झेलनी पड़ी।अब सभी की नजर प्रशासन पर है कि क्या जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई होगी या यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा।









