MP Honey Trap: इंदौर। मध्यप्रदेश का चर्चित हनी ट्रैप मामला एक बार फिर सुर्खियों में है। इस बार मामला केवल ब्लैकमेलिंग तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके तार कथित तौर पर राजनीति, पुलिस तंत्र, करोड़ों रुपये की उगाही और कई प्रभावशाली लोगों से जुड़े नेटवर्क तक पहुंचते नजर आ रहे हैं। MP Honey Trap 2 के नाम से चर्चित इस मामले में अब तक सात आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है, जबकि जांच एजेंसियां पूरे नेटवर्क की परतें खोलने में जुटी हुई हैं।
MP Honey Trap :मामले की गंभीरता को देखते हुए इंदौर क्राइम ब्रांच ने विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया है। वहीं सूत्रों के अनुसार केंद्रीय खुफिया एजेंसियां भी मामले की गतिविधियों पर नजर बनाए हुए हैं और जांच से जुड़े तथ्यों की जानकारी जुटाई जा रही है।
कारोबारी की शिकायत से खुला पूरा मामला
MP Honey Trap:पूरे मामले का खुलासा तब हुआ जब कारोबारी हितेंद्र सिंह चौहान उर्फ चिंटू ठाकुर ने पुलिस से शिकायत की। शिकायत में आरोप लगाया गया कि निजी फोटो और वीडियो सार्वजनिक करने की धमकी देकर उनसे करीब एक करोड़ रुपये की मांग की जा रही थी।
MP Honey Trap:पुलिस जांच में सामने आया कि आरोपियों ने कारोबारी से संपर्क बढ़ाकर कथित रूप से विश्वास हासिल किया और बाद में उसे ब्लैकमेल करना शुरू किया। आरोप है कि कारोबारी को सुपर कॉरिडोर क्षेत्र में बुलाकर दबाव बनाया गया तथा कथित रूप से मारपीट भी की गई। साथ ही कारोबार में हिस्सेदारी नहीं देने पर निजी वीडियो वायरल करने की धमकी दी गई।
2019 के चर्चित हनी ट्रैप कांड से जुड़े तार
MP Honey Trap:जांच आगे बढ़ने पर इस मामले के संबंध वर्ष 2019 में सामने आए बहुचर्चित हनी ट्रैप प्रकरण से भी जुड़ते दिखाई दिए। जांच एजेंसियों को ऐसे संकेत मिले हैं कि पुराने नेटवर्क से जुड़े कुछ लोगों का संपर्क नए मामले में गिरफ्तार आरोपियों से था।
MP Honey Trap:सूत्रों के अनुसार जेल में हुई मुलाकातों के बाद कथित रूप से एक नया नेटवर्क तैयार किया गया, जो प्रभावशाली व्यक्तियों को निशाना बनाकर ब्लैकमेलिंग और उगाही की गतिविधियों को अंजाम देता था। हालांकि इन तथ्यों की पुष्टि जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
अब तक 7 आरोपी गिरफ्तार
MP Honey Trap:पुलिस ने मामले में अब तक सात लोगों को गिरफ्तार किया है। इनमें अलका दीक्षित, जयदीप दीक्षित, लाखन चौधरी, जितेंद्र पुरोहित, श्वेता विजय जैन, विनोद शर्मा और रेशू उर्फ अभिलाषा चौधरी शामिल हैं।
MP Honey Trap:हाल ही में गिरफ्तार रेशू उर्फ अभिलाषा चौधरी और इंटेलिजेंस विंग के हेड कांस्टेबल विनोद शर्मा को अदालत में पेश किया गया, जहां से दोनों को पुलिस रिमांड पर भेजा गया। जांच एजेंसियां उनसे नेटवर्क, संपर्कों और आर्थिक लेनदेन से जुड़ी जानकारी जुटाने का प्रयास कर रही हैं।
पुलिसकर्मी की भूमिका भी जांच के दायरे में
MP Honey Trap:जांच में गिरफ्तार हेड कांस्टेबल विनोद शर्मा की भूमिका भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। आरोप है कि वह कथित रूप से आरोपियों को कानूनी प्रक्रिया और पुलिस कार्रवाई से बचने संबंधी सलाह देता था। पुलिस अब यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि उसने नेटवर्क को किस स्तर तक सहयोग प्रदान किया।
कई राज्यों तक फैला हो सकता है नेटवर्क
MP Honey Trap:प्रारंभिक जांच में यह भी संकेत मिले हैं कि कथित गिरोह का नेटवर्क केवल मध्यप्रदेश तक सीमित नहीं था। जांच एजेंसियां उन संपर्कों और गतिविधियों की पड़ताल कर रही हैं जिनका संबंध अन्य राज्यों से हो सकता है। डिजिटल डेटा और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की फोरेंसिक जांच के जरिए नेटवर्क की वास्तविक पहुंच का पता लगाया जा रहा है।
मोबाइल, लैपटॉप और डिजिटल डेटा की जांच जारी
MP Honey Trap:क्राइम ब्रांच की टीम आरोपियों से बरामद मोबाइल फोन, लैपटॉप, हार्ड डिस्क और अन्य डिजिटल उपकरणों की विस्तृत जांच कर रही है। अधिकारियों का मानना है कि इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों से नेटवर्क की कार्यप्रणाली, संपर्कों और कथित उगाही से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्य सामने आ सकते हैं।
SIT कर रही है गहन पूछताछ
MP Honey Trap:मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए गठित एसआईटी लगातार आरोपियों से पूछताछ कर रही है। पुलिस का कहना है कि जांच सभी पहलुओं को ध्यान में रखकर की जा रही है और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई होगी।
MP Honey Trap:फिलहाल जांच जारी है और एजेंसियां पूरे नेटवर्क की वास्तविक संरचना, कथित पीड़ितों की संख्या और संभावित आर्थिक लेनदेन की जानकारी जुटाने में लगी हुई हैं। आने वाले दिनों में जांच के आधार पर और भी महत्वपूर्ण तथ्य सामने आने की संभावना जताई जा रही है।









