Friday, August 21, 2026
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MP Farmers Issue: बैतूल में महिला स्व-सहायता समूहों की मनमानी, समर्थन मूल्य खरीदी केंद्रों पर किसानों से खुली लूट जारी…

बैतूल। मध्य प्रदेश का बैतूल जिला इन दिनों राजनीतिक गलियारों में काफी चर्चा में है। भारतीय जनता पार्टी के प्रदेशाध्यक्ष का गृह जिला होने के कारण यह क्षेत्र सुर्खियों में बना हुआ है। इसके विपरीत, इसी जिले में समर्थन मूल्य पर फसल बेचने आए किसानों के साथ खुली लूट का खेल चल रहा है। प्रशासन ने यहाँ कुल 64 खरीदी केंद्र बनाए हैं। इनमें से कुछ केंद्रों की कमान महिला स्व-सहायता समूहों के हाथों में सौंपी गई है। आरोप है कि समूह की महिलाएँ अपनी इस स्थिति का गलत फायदा उठा रही हैं और अन्नदाताओं को परेशान कर रही हैं।

बुनियादी सुविधाओं का घोर अभाव

राज्य शासन के स्पष्ट आदेश हैं कि प्रत्येक खरीदी केंद्र पर किसानों के लिए छायादार विश्राम स्थल होना चाहिए। इसके साथ ही शीतल पेयजल, फर्स्ट एड बॉक्स और कैंटीन की व्यवस्था करना भी अनिवार्य है। इसके विपरीत, धरातल पर इन सरकारी दावों की हवा निकल चुकी है। जिले के खेड़ी सांवलीगढ़ और जीन खरीदी केंद्रों पर हालात बदतर हो चुके हैं। यहाँ शीतल जल के नाम पर महज एक टैंकर या सिंटेक्स की टंकी खड़ी कर दी गई है। चिलचिलाती धूप में यह पानी बेहद गर्म हो जाता है, जिससे किसानों की प्यास बुझना नामुमकिन है।

तुलाई के नाम पर खुली वसूली

नियमों के मुताबिक खरीदी केंद्रों पर फसलों की तुलाई पूरी तरह निशुल्क होनी चाहिए। हालांकि, इन केंद्रों पर किसानों से 15 रुपये प्रतिक्विंटल की दर से हम्माली वसूली जा रही है।

महिला प्रभारियों की मौजूदगी का फायदा उठाकर यह अवैध खेल जोरों पर चल रहा है। परिणामस्वरूप, सीधे-साधे किसान उनके सामने अपनी आवाज उठाने में खुद को असमर्थ पा रहे हैं। अपनी मेहनत की फसल को सही समय पर बेचने के लिए वे इन अनुचित मांगों को मानने पर मजबूर हैं।

स्लॉट बुकिंग की दोहरी मार

इसके अलावा, किसान पहले से ही स्लॉट बुक न होने की समस्या से काफी परेशान हैं। किसी तरह स्लॉट बुक होने के बाद जब वे केंद्र पर पहुँचते हैं, तो उन्हें इस अव्यवस्था का सामना करना पड़ता है। अपनी फसल को खराब होने से बचाने के लिए वे चुपचाप जेबें ढीली कर रहे हैं। दूसरी ओर, जिम्मेदार अधिकारी इस पूरे मामले को लेकर पूरी तरह से आंखें मूंदे बैठे हैं। यही कारण है कि इन सेंटरों पर धड़ल्ले से किसानों का आर्थिक शोषण किया जा रहा है।

प्रशासन की कार्रवाई का इंतजार

अंततः, इस पूरे घटनाक्रम ने जिले के प्रशासनिक तंत्र की सजगता पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। अब हर किसी की नजरें जिले के नवागत और तेजतर्रार कलेक्टर पर टिकी हुई हैं। जनता यह देखना चाहती है कि वे इस गंभीर मामले में क्या संज्ञान लेते हैं। क्या नियमों की धज्जियां उड़ाने वाली इन समूह की महिलाओं पर कोई ठोस कार्रवाई होगी, या फिर खरीदी केंद्रों पर किसानों का यह शोषण यूं ही जारी रहेगा?

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