SEBI New Rules: नई दिल्ली। देश के करोड़ों नौकरीपेशा लोगों और म्यूचुअल फंड निवेशकों के लिए शेयर बाजार नियामक सेबी (SEBI) एक बेहद शानदार और बड़ा बदलाव करने की तैयारी में है। सेबी ने म्यूचुअल फंड निवेश को आम लोगों के लिए और अधिक सुलभ, लचीला तथा लोकप्रिय बनाने के उद्देश्य से एक नया कंसल्टेशन पेपर जारी किया है। इस नए प्रस्ताव के तहत अब कर्मचारियों की सैलरी से हर महीने म्यूचुअल फंड की सिस्टेमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIP) सीधे कट सकेगी। यह पूरी प्रक्रिया ठीक उसी तरह काम करेगी, जैसे वर्तमान में पीएफ (PF) या एनपीएस (NPS) का पैसा हर महीने कर्मचारियों के वेतन से ऑटोमैटिक कट जाता है। इस ऐतिहासिक कदम से बाजार में अनुशासित और नियमित बचत को एक नया आयाम मिलने की उम्मीद है।
कर्मचारी की सहमति होगी अनिवार्य, कंपनियों को मिलेगा विकल्प
सेबी द्वारा पेश किए गए ड्राफ्ट के मुताबिक, यह ‘पेरोल लिंक्ड एसआईपी’ (Payroll Linked SIP) की सुविधा सभी लिस्टेड कंपनियों, ईपीएफओ (EPFO) के तहत रजिस्टर्ड कंपनियों और एसेट मैनेजमेंट कंपनियों (AMCs) को दी जा सकेगी। हालांकि, कंपनियों या नियोक्ताओं के लिए यह अनिवार्य नहीं होगा कि वे कर्मचारियों का पैसा जबरन काटें। इस सिस्टम में कर्मचारी की लिखित सहमति और ‘ऑप्ट-इन’ (Opt-in) का विकल्प चुनना बेहद जरूरी होगा। यानी, जब तक कर्मचारी खुद इस योजना का हिस्सा बनने की लिखित मंजूरी नहीं देगा, तब तक उसकी सैलरी से कोई कटौती नहीं की जा सकेगी। इसका सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि मध्यमवर्गीय नौकरीपेशा लोगों को हर महीने की तय तारीख पर मैन्युअल रूप से एसआईपी भुगतान करने या बैंक खाते में बैलेंस की चिंता नहीं करनी पड़ेगी।
म्यूचुअल फंड डिस्ट्रीब्यूटर्स को कैश के बजाय मिलेंगी यूनिट्स
सैलरी से एसआईपी काटने के अलावा सेबी ने म्यूचुअल फंड डिस्ट्रीब्यूटर्स (एजेंट्स) के लिए भी एक क्रांतिकारी बदलाव का सुझाव दिया है। वर्तमान व्यवस्था के तहत डिस्ट्रीब्यूटर्स को उनका ‘ट्रेल कमीशन’ सीधे नकद (कैश) के रूप में बैंक खातों में दिया जाता है। लेकिन नए प्रस्ताव में उन्हें इस कमीशन को नकद लेने के बजाय सीधे उसी म्यूचुअल फंड की ‘यूनिट्स’ के रूप में पाने का विकल्प देने की बात कही गई है। सेबी का मानना है कि इस कदम से डिस्ट्रीब्यूटर्स खुद भी लंबे समय तक बाजार में निवेश से जुड़े रहेंगे, जिससे निवेशकों और एजेंटों के हित आपस में मजबूती से जुड़ सकेंगे और बाजार में पारदर्शिता बढ़ेगी।
म्यूचुअल फंड से सामाजिक कार्यों के लिए कर सकेंगे डोनेशन
इस नए कंसल्टेशन पेपर में समाज कल्याण को बढ़ावा देने के लिए म्यूचुअल फंड के जरिए सीधे डोनेशन (दान) करने की अनूठी सुविधा का भी जिक्र है। इसके लिए सेबी ने मुख्य रूप से दो मॉडल्स पर विचार करने का प्रस्ताव रखा है। पहले मॉडल के तहत निवेशक सीधे सोशल स्टॉक एक्सचेंज (SSE) पर रजिस्टर्ड एनजीओ को अपनी मर्जी से योगदान दे सकेंगे। वहीं, दूसरे मॉडल के अंतर्गत एक विशेष ‘डेडिकेटेड सोशल कंट्रीब्यूशन म्यूचुअल फंड स्कीम’ शुरू की जाएगी, जिसके जरिए एकत्रित होने वाली राशि को सामाजिक और परोपकारी कार्यों में निवेश किया जाएगा।
10 जून 2026 तक आम जनता से मांगी गई है राय
सेबी ने स्पष्ट किया है कि ये नए नियम अभी प्रारंभिक चरण में हैं और इन्हें पूर्ण रूप से लागू नहीं किया गया है। बाजार नियामक ने इस पूरे कंसल्टेशन पेपर पर देश के आम नागरिकों, वित्तीय संस्थाओं, कंपनियों और बाजार के सभी एक्सपर्ट्स से 10 जून 2026 तक सुझाव, आपत्तियां और राय मांगी है। यदि इन सुझावों को व्यापक समर्थन मिलता है और सभी पक्षों की सहमति के बाद यह नियम कानून का रूप लेता है, तो आने वाले समय में भारत के भीतर निवेश करने और म्यूचुअल फंड के जरिए पूंजी खड़ी करने की पूरी व्यवस्था बेहद सरल और सुरक्षित हो जाएगी।









