Road accident insurance compensation court verdict : इंदौर में हुए दर्दनाक सड़क हादसे में जान गंवाने वाले चार कारोबारियों के परिजनों को जिला कोर्ट ने बड़ी राहत दी है। अदालत ने बीमा कंपनी को ब्याज सहित 3 करोड़ रुपये से अधिक मुआवजा देने का आदेश जारी किया है। इस मामले में सबसे अहम बात यह रही कि कोर्ट ने मृतकों के आयकर रिटर्न (IT Return) को आय का मुख्य और पर्याप्त प्रमाण माना।
कैसे हुआ था हादसा
यह दुर्घटना 25 अक्टूबर 2024 को जावदा-नागदा रोड पर हुई थी। इंदौर के छह लोग इनोवा कार से अजमेर शरीफ दर्शन कर लौट रहे थे। सुबह करीब 6:30 बजे तेज रफ्तार कंटेनर ने उनकी कार को जोरदार टक्कर मार दी। इस हादसे में चार लोगों—मो. आसिफ मंसूरी, अब्दुल मन्नान कुरैशी, इमरान मंसूरी और समीद खान—की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि दो लोग घायल हो गए।
कोर्ट में क्या हुआ
मामले में पीड़ित परिवारों ने जिला कोर्ट में अलग-अलग छह याचिकाएं दायर की थीं। याचिकाकर्ताओं ने मृतकों के तीन वर्षों के आयकर रिटर्न और अन्य दस्तावेज पेश किए। बीमा कंपनी ने दावा किया कि आय के अन्य प्रमाण नहीं हैं, इसलिए मुआवजा सीमित होना चाहिए।
लेकिन कोर्ट ने बीमा कंपनी की आपत्ति को खारिज करते हुए कहा कि जब वैध आयकर रिटर्न उपलब्ध हैं, तो अतिरिक्त प्रमाण की आवश्यकता नहीं है।
परिवारों की स्थिति
कोर्ट में यह भी साबित किया गया कि सभी मृतक अपने-अपने परिवार के मुख्य कमाने वाले थे। उनकी मौत के बाद परिवार आर्थिक संकट में आ गया। कई परिवारों ने करोड़ों रुपये के मुआवजे की मांग की थी।
कोर्ट का अंतिम आदेश
अदालत ने परिस्थितियों और दस्तावेजों को देखते हुए अलग-अलग मुआवजा तय किया—
- मो. आसिफ मंसूरी परिवार: 1.06 करोड़ रुपये
- अब्दुल मन्नान परिवार: 98 लाख रुपये
- इमरान मंसूरी परिवार: 65 लाख रुपये
- समीद खान परिवार: 15 लाख रुपये
- घायल व्यक्तियों को भी अलग-अलग मुआवजा
इसके साथ ही बीमा कंपनी को ब्याज सहित भुगतान करने का आदेश दिया गया है।
महत्वपूर्ण संदेश
यह फैसला ऐसे मामलों में एक महत्वपूर्ण मिसाल माना जा रहा है, जहां आयकर रिटर्न को मजबूत कानूनी साक्ष्य के रूप में स्वीकार किया गया है। इससे भविष्य में बीमा दावों से जुड़े मामलों में पारदर्शिता और स्पष्टता बढ़ने की उम्मीद है।









