Thursday, August 27, 2026
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M.P News : 28 साल पुराने फर्जीवाड़े में बड़ा एक्शन! अपेक्स बैंक के पूर्व MD प्रदीप नीखरा जेल पहुंचे

निशानेबाज न्यूज़ डेस्क :  मध्य प्रदेश के सहकारिता विभाग के रिटायर्ड अधिकारी और अपेक्स बैंक के पूर्व प्रबंध संचालक (MD) प्रदीप नीखरा को 28 साल पुराने फर्जीवाड़े के मामले में जेल भेज दिया गया है। यह मामला सहकारी आवास संघ से जुड़ा है, जिसमें करोड़ों रुपए के फर्जी लोन मंजूर किए गए थे।

ACB (Anti-Corruption Bureau) और EOW (Economic Offences Wing) की संयुक्त कार्रवाई में नीखरा को 3 अप्रैल को भोपाल स्थित उनके निवास से गिरफ्तार किया गया था। इसके बाद उन्हें रायपुर ले जाकर कोर्ट में पेश किया गया, जहां से रिमांड के बाद 7 अप्रैल को जेल भेज दिया गया।

फर्जी लोन का पूरा खेल कैसे हुआ?

जांच में सामने आया कि 1995 से 1998 के बीच, जब प्रदीप नीखरा मध्य प्रदेश आवास संघ में जनरल मैनेजर के पद पर थे, तब उन्होंने रायपुर की एक सहकारी समिति के नाम पर 186 लोगों को लोन मंजूर किया था।

हर व्यक्ति के नाम पर करीब 1-1 लाख रुपये का लोन स्वीकृत किया गया, जिससे कुल रकम 1.86 करोड़ रुपये तक पहुंच गई।

लेकिन जब जांच एजेंसियों ने इस मामले की तहकीकात की, तो चौंकाने वाला सच सामने आया—

  • समिति के सदस्य पूरी तरह फर्जी थे
  • जिन प्लॉट्स के नाम पर लोन दिया गया, वे अस्तित्व में ही नहीं थे
  • पूरा मामला कागजी हेराफेरी पर आधारित था

 जांच में खुली परतें, बढ़ी मुश्किलें

ACB और EOW की जांच में यह साफ हो गया कि यह एक संगठित आर्थिक अपराध था, जिसमें सरकारी पद का दुरुपयोग कर फर्जी तरीके से लोन पास किए गए।

जांच एजेंसियां अब इस बात की भी पड़ताल कर रही हैं कि इस घोटाले में और कौन-कौन लोग शामिल थे और क्या यह नेटवर्क बड़े स्तर पर फैला हुआ था।

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अपेक्स बैंक विवाद से भी जुड़ा रहा नाम

प्रदीप नीखरा का नाम पहले भी विवादों में रह चुका है। वे साल 2020 तक अपेक्स बैंक, भोपाल में MD के पद पर थे।

बताया जाता है कि बैंक भर्ती में अनियमितताओं के चलते उन्हें रिटायरमेंट से महज 10 दिन पहले पद से हटा दिया गया था। इसके बाद उन्होंने सहकारिता विभाग से संयुक्त पंजीयक (JR) पद से सेवानिवृत्ति ली।

राजनीतिक और संगठनात्मक कनेक्शन

रिटायरमेंट के बाद नीखरा मध्यप्रदेश सहकार भारती से जुड़ गए और संगठन में प्रदेश उपाध्यक्ष का पद संभाल रहे थे।

इसके अलावा उनका संबंध कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व सांसद रामेश्वर नीखरा से भी बताया जाता है, जिससे इस मामले को लेकर राजनीतिक चर्चा भी तेज हो गई है।

क्या संकेत देता है यह मामला? 

यह केस बताता है कि सहकारी संस्थाओं में वर्षों पहले हुए घोटाले भी जांच एजेंसियों की पकड़ से बच नहीं पाते।
साथ ही, यह कार्रवाई एक सख्त संदेश भी देती है कि वित्तीय अनियमितताओं और भ्रष्टाचार के मामलों में देरी भले हो, लेकिन कार्रवाई तय है।

सरकारी सिस्टम में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने के लिए इस तरह की कार्रवाइयां महत्वपूर्ण मानी जा रही हैं।

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