Thursday, August 20, 2026
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Singrauli News : सिंगरौली में स्कूलों की मनमानी पर बड़ा सवाल: बच्चों की सुरक्षा, सुविधा और मान्यता सब दांव पर, फिर भी प्रशासन मौन क्यों ?

Singrauli News
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Singrauli News : सिंगरौली : सिंगरौली जिले में निजी स्कूलों की बेतरतीब बढ़ोतरी और उनके दावों ने अब गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जिले के बरगवां क्षेत्र में संचालित कई प्राइवेट स्कूल खुद को आधुनिक शिक्षा, बेहतर भविष्य और सुरक्षित वातावरण का केंद्र बताकर प्रचार-प्रसार में जुटे हैं, लेकिन ज़मीनी हकीकत इससे बिल्कुल उलट नजर आ रही है स्थानीय स्तर पर लगातार यह आरोप उठ रहे हैं कि इन स्कूलों में न तो बच्चों को सुरक्षित लाने-ले जाने की समुचित व्यवस्था है, न खेलकूद के लिए पर्याप्त मैदान, और न ही वे बुनियादी सुविधाएं जो किसी भी मान्यता प्राप्त स्कूल के लिए अनिवार्य मानी जाती हैं। कई जगहों पर शौचालय, पेयजल, सुरक्षा व्यवस्था, खुला परिसर और आपातकालीन इंतजाम जैसी मूलभूत जरूरतें भी सवालों के घेरे में हैं सबसे बड़ा और गंभीर सवाल यह है कि आखिर इन स्कूलों को मान्यता किस आधार पर दी गई?

 

Singrauli News : क्या इन संस्थानों की मौके पर जाकर सही तरीके से जांच की गई थी, या फिर कागजों पर ही सब कुछ ठीक मान लिया गया? अगर मान्यता देने की प्रक्रिया में नियमों की अनदेखी हुई है, तो यह सीधे तौर पर बच्चों के भविष्य और अभिभावकों के भरोसे के साथ खिलवाड़ है सरकार जहां बच्चों की शिक्षा, सुरक्षा और स्वास्थ्य को लेकर लगातार सख्त नियम बना रही है, वहीं कुछ निजी स्कूल इन नियमों की खुलेआम धज्जियां उड़ाते दिखाई दे रहे हैं। ऐसे में यह सवाल और भी तीखा हो जाता है कि जिला प्रशासन, शिक्षा विभाग और संबंधित अधिकारियों की निगरानी आखिर किस काम की है, यदि मान्यता के बाद भी स्कूलों की हालत पर कोई असर नहीं पड़ता अभिभावकों और स्थानीय लोगों का कहना है कि शिक्षा के नाम पर बच्चों से मोटी फीस वसूली जा रही है, लेकिन सुविधाओं के नाम पर केवल दिखावा है।

 

Singrauli News : स्कूल प्रबंधन विज्ञापन और प्रचार में तो आगे है, लेकिन वास्तविक व्यवस्था में भारी खामियां साफ दिखाई देती हैं। अब जरूरत है कि जिला प्रशासन इस पूरे मामले को गंभीरता से संज्ञान में ले। इन स्कूलों की निष्पक्ष जांच हो, मान्यता की प्रक्रिया की समीक्षा की जाए और जो संस्थान नियमों का पालन नहीं कर रहे हैं, उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए। बच्चों के भविष्य के साथ किसी भी तरह का समझौता अब और नहीं चल सकता। सवाल साफ है आखिर प्रशासन की नींद कब खुलेगी, और कब इन स्कूलों पर शिकंजा कसेगा?

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