नई दिल्ली। अमेरिकी सरकार द्वारा H-1B वीजा फीस को 1 लाख डॉलर (करीब 88 लाख रुपये) तक बढ़ाए जाने का असर सोमवार को भारतीय शेयर बाजार में साफ दिखाई दिया। आईटी सेक्टर की दिग्गज कंपनियों TCS और Infosys समेत कई कंपनियों के शेयरों में भारी गिरावट दर्ज हुई, जिससे निवेशकों के लगभग ₹63,000 करोड़ रुपये डूब गए।
TCS और Infosys में सबसे ज्यादा गिरावट
- TCS का शेयर ₹3,063 तक लुढ़का और 2.87% की गिरावट के साथ ₹3,080.80 पर कारोबार करता दिखा।
- Infosys के शेयर ₹1,480 तक गिरे और फिलहाल ₹1,500.30 पर कारोबार कर रहे हैं।
- इसके अलावा Wipro, HCL Tech, Tech Mahindra, LTIMindtree, Coforge और Mphasis में भी 2-3% की गिरावट दर्ज की गई।
क्या है नया वीजा नियम?
- H-1B वीजा फीस अब 88 लाख रुपये हो गई है।
- यह शुल्क सिर्फ नए आवेदनों (New Applicants) पर लागू होगा।
- मौजूदा वीजाधारकों और नवीनीकरण (Renewals) पर इसका असर नहीं होगा।
- यह एक बार-फीस है, हर साल नहीं लगेगी।
- पहले H-1B के लिए करीब 6 लाख रुपये खर्च आते थे।
विश्लेषकों की राय
- IIFL Securities के अनुसार, इस फैसले से IT कंपनियों के EBIT मार्जिन पर 20-60 बेसिस प्वाइंट्स और EPS पर 1.2-4.5% तक असर हो सकता है।
- JM Financial और Nuvama का मानना है कि कंपनियां इस लागत को संतुलित करने के लिए ऑफशोरिंग बढ़ा सकती हैं, केवल जरूरी भूमिकाओं के लिए H-1B लेंगी और स्थानीय स्तर पर अधिक भर्ती करेंगी।
- बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, इसका असर शॉर्ट टर्म में रहेगा, लेकिन लंबे समय में भारतीय IT सेक्टर मजबूत रहेगा।
भारत पर असर
H-1B वीजा भारतीय आईटी प्रोफेशनल्स के लिए अमेरिका जाने का सबसे अहम रास्ता है। फीस बढ़ोतरी से लागत तो जरूर बढ़ेगी, लेकिन कंपनियों की रणनीति और रिकवरी क्षमता को देखते हुए निवेशकों को घबराने के बजाय तिमाही नतीजों और कंपनियों की नीतियों पर नजर रखने की सलाह दी जा रही है।











