22nd Security Camp : सुकमा। सुकमा जिले के धुर नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में लाल आतंक को जड़ से मिटाने और विकास की रोशनी पहुँचाने की दिशा में शासन-प्रशासन को एक और बड़ी रणनीतिक सफलता मिली है। छत्तीसगढ़ सरकार की महत्वाकांक्षी ‘नियद नेल्लानार’ (आपका अच्छा गाँव) योजना के तहत ग्राम पेदाबोड़केल में जिले का 22वाँ सुरक्षा कैंप स्थापित कर दिया गया है। इस कदम से न केवल नक्सलियों की सुरक्षित पनाहगाहों पर कड़ा प्रहार हुआ है, बल्कि वर्षों से कटे हुए चिंतलनार-रायगुडेम मार्ग के बीच की कनेक्टिविटी भी बहाल हो गई है।
22nd Security Camp : चिंतलनार-रायगुडेम मार्ग का खुलना: विकास की नई लाइफलाइन पेदाबोड़केल कैंप की स्थापना से इस दुर्गम क्षेत्र की भौगोलिक बाधाएं दूर हो गई हैं। अब चिंतलनार से रायगुडेम तक का सफर सीधा और सुगम हो गया है। सड़क मार्ग जुड़ने से ग्रामीणों को अब बुनियादी सुविधाएं जैसे बिजली, स्वच्छ पेयजल, स्वास्थ्य सेवाएं, राशन (PDS) और शिक्षा के लिए भटकना नहीं पड़ेगा। सुरक्षा बलों की मौजूदगी ने निर्माण कार्यों के लिए एक सुरक्षित वातावरण तैयार कर दिया है, जिससे लंबे समय से लंबित पुल-पुलिया और मोबाइल कनेक्टिविटी के कार्यों में तेजी आएगी।
22nd Security Camp : 2024 से अब तक 22 कैंपों का सुरक्षा घेरा पुलिस अधीक्षक किरण चव्हाण और वरिष्ठ अधिकारियों के मार्गदर्शन में यह कैंप 10 दिसंबर 2025 को स्थापित किया गया। बता दें कि वर्ष 2024 से अब तक सुकमा में 22 नवीन कैंप स्थापित किए जा चुके हैं, जिनमें पुवर्ती, टेकलगुड़ेम और गोलाकोण्डा जैसे अति संवेदनशील स्थान शामिल हैं। इन कैंपों ने नक्सलियों की संचार व्यवस्था को ध्वस्त कर दिया है और सुरक्षा बलों की पकड़ को मज़बूत किया है।
22nd Security Camp : आंकड़ों में दिख रहा बदलाव: 599 नक्सलियों ने छोड़ा रास्ता ‘नियद नेल्लानार’ योजना की सफलता का सबसे बड़ा प्रमाण वे आंकड़े हैं, जो क्षेत्र में लौटती शांति की तस्दीक कर रहे हैं। योजना के प्रभाव से अब तक 599 नक्सलियों ने हिंसा त्यागकर आत्मसमर्पण किया है। वहीं, आक्रामक अभियानों में 68 माओवादी ढेर हुए और 460 को गिरफ्तार करने में सफलता मिली है। पुलिस के बढ़ते कदमों ने नक्सलियों को बैकफुट पर धकेल दिया है।
22nd Security Camp : आमजनों में उत्साह: अब बंदूकों की जगह विकास की चर्चा कभी खौफ के साये में जीने वाले ग्रामीणों में इस नए कैंप को लेकर भारी उत्साह देखा जा रहा है। पेदाबोड़केल, पालागुड़ा और गोगुंडा जैसे गाँवों के लोगों का मानना है कि कैंप आने से अब विकास की योजनाएं सीधे उन तक पहुँच सकेंगी। प्रशासन की यह रणनीति स्पष्ट संदेश दे रही है कि बंदूक की जगह विश्वास और विकास ही नक्सलवाद का अंतिम समाधान है।













