WPI Inflation India: नई दिल्ली। देश की मैक्रो-आर्थिक मोर्चे से एक बेहद महत्वपूर्ण और आम जनता के साथ-साथ उद्योगों को प्रभावित करने वाली बड़ी खबर सामने आ रही है। वैश्विक स्तर पर जारी भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल के बाजार में मची उथल-पुथल के बीच भारत में थोक मूल्यों पर आधारित महंगाई दर में एक बार फिर तेज उछाल दर्ज किया गया है। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय द्वारा सोमवार को जारी किए गए ताजा आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार देश में थोक महंगाई दर मई दो हजार छब्बीस में बढ़कर नौ दशमलव छह आठ प्रतिशत के स्तर पर पहुंच गई है। गौरतलब है कि इससे ठीक एक महीने पहले यानी अप्रैल दो हजार छब्बीस में यह दर आठ दशमलव दो छह प्रतिशत दर्ज की गई थी। इस बार के महंगाई आंकड़ों में सबसे खास और ऐतिहासिक बात यह है कि मंत्रालय ने एक दशक से भी अधिक समय से चले आ रहे पुराने आधार वर्ष दो हजार ग्यारह बारह की जगह अब बिल्कुल नए आधार वर्ष दो हजार बाईस तेईस के आधार पर यह डब्ल्यूपीआई डेटा जारी किया है।
वैश्विक तेल बाजारों में मची उथल-पुथल और पश्चिम एशिया के संघर्ष को इस अप्रत्याशित बढ़ोतरी की सबसे मुख्य और बड़ी वजह माना जा रहा है।
ईंधन और बिजली क्षेत्र ने दिया देश की अर्थव्यवस्था को सबसे बड़ा झटका
थोक मूल्य सूचकांक में दर्ज की गई इस भारी बढ़ोतरी में सबसे बड़ा और मुख्य योगदान ईंधन तथा बिजली क्षेत्र का रहा है। आंकड़ों के मुताबिक मई दो हजार छब्बीस के दौरान फ्यूल एंड पावर सेगमेंट की थोक महंगाई दर उछलकर तीस दशमलव तीन तीन प्रतिशत के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई जो अप्रैल महीने में चौबीस दशमलव आठ नौ प्रतिशत के स्तर पर थी। इसके भीतर भी मिनरल ऑयल यानी विभिन्न प्रकार के पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों में साल दर साल के आधार पर उनचास दशमलव बयासी प्रतिशत की भारी-भरकम तेजी दर्ज की गई है। इसके साथ ही अंतरराष्ट्रीय बाजार में आपूर्ति प्रभावित होने से कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस की थोक महंगाई दर इकसठ दशमलव पांच एक प्रतिशत के बेहद चिंताजनक स्तर पर पहुंच गई है। पश्चिम एशिया में जारी लंबे सैन्य संघर्ष के चलते वैश्विक कच्चे तेल के बाजार में छाई अनिश्चितता का सीधा नकारात्मक असर घरेलू थोक कीमतों पर स्पष्ट रूप से देखने को मिल रहा है।
प्राथमिक वस्तुओं और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में भी दर्ज की गई उल्लेखनीय तेजी
खेती, किसानी और खनन गतिविधियों से सीधे जुड़ी प्राथमिक वस्तुओं यानी प्राइमरी आर्टिकल्स की थोक महंगाई दर भी मई महीने में बढ़कर चार दशमलव नौ नौ प्रतिशत पर पहुंच गई, जो इससे पिछले महीने में तीन दशमलव सात आठ प्रतिशत दर्ज की गई थी। प्राथमिक वस्तुओं के भीतर गैर-खाद्य उत्पाद यानी नॉन-फूड आर्टिकल्स की श्रेणी में थोक कीमतें नौ दशमलव चार नौ प्रतिशत की दर से महंगी हुई हैं। दूसरी तरफ देश के औद्योगिक उत्पादन को दर्शाने वाले मैन्युफैक्चर्ड प्रोडक्ट्स यानी विनिर्मित उत्पादों की थोक महंगाई दर भी बढ़कर सात दशमलव चार आठ प्रतिशत हो गई है, जो अप्रैल के महीने में छह दशमलव छह आठ प्रतिशत के स्तर पर बनी हुई थी। औद्योगिक क्षेत्र के भीतर विशेष रूप से विभिन्न प्रकार के केमिकल्स, बेसिक मेटल्स और टेक्सटाइल यानी कपड़ा उद्योग की इनपुट लागत में बहुत ही उल्लेखनीय और तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई है जिससे कंपनियों के मार्जिन पर दबाव बढ़ सकता है।
खाद्य तेल और मांस-मछली महंगे होने से फूड इंडेक्स का तापमान बढ़ा
आम उपभोक्ताओं के रसोई बजट को प्रभावित करने वाले डब्ल्यूपीआई खाद्य सूचकांक यानी फूड इंडेक्स की थोक महंगाई दर मई दो हजार छब्बीस में बढ़कर चार दशमलव चार नौ प्रतिशत पर पहुंच गई है, जबकि अप्रैल महीने में यह आंकड़ा तीन दशमलव एक एक प्रतिशत के स्तर पर सीमित था। खाद्य क्षेत्र में इस बढ़ोतरी की मुख्य वजह बाजार में खाद्य तेलों, अंडों, मांस, मछली और अन्य प्रसंस्कृत खाद्य उत्पादों की कीमतों में आई हालिया तेजी को माना जा रहा है। हालांकि आम जनता के लिए थोड़ी राहत की बात यह भी रही कि दालें, आलू और प्याज जैसी आवश्यक बुनियादी सब्जियों की थोक कीमतें अभी भी पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले काफी कम बनी हुई हैं।
नई डब्ल्यूपीआई सीरीज आज से देश भर में पूरी तरह लागू
केंद्र सरकार ने आर्थिक वास्तविकताओं को बेहतर ढंग से दर्शाने के लिए आज से डब्ल्यूपीआई की पूरी गणना प्रणाली में आमूलचूल बदलाव कर दिया है। इसके तहत आधार वर्ष को दो हजार ग्यारह बारह से संशोधित कर दो हजार बाईस तेईस किया गया है और इसके साथ ही नई सीरीज में शामिल की जाने वाली वस्तुओं की कुल संख्या को छह सौ सत्तानवे से बढ़ाकर सीधे नौ सौ सत्तावन कर दिया गया है। इसके अतिरिक्त आधुनिक अर्थव्यवस्था की जरूरतों को देखते हुए सरकार ने आज से आउटपुट प्रोड्यूसर प्राइस इंडेक्स और सर्विस प्रोड्यूसर प्राइस इंडेक्स को भी आधिकारिक रूप से जारी करना शुरू कर दिया है। सेवा क्षेत्र के इस नए सूचकांक में बैंकिंग, बीमा, टेलीकॉम, रेलवे और एयर पैसेंजर जैसी पांच प्रमुख बुनियादी सेवाओं को शामिल किया गया है। वाणिज्य मंत्रालय के अनुसार आगामी जून दो हजार छब्बीस की अगली थोक महंगाई रिपोर्ट आगामी चौदह जुलाई को जारी की जाएगी।









