लखनऊ। उत्तर प्रदेश एंटी-टेररिज्म स्क्वॉड (ATS) ने एक बड़े अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश किया है, जो रोहिंग्या, बांग्लादेशी और नेपाली नागरिकों समेत विदेशी नागरिकों के लिए फर्जी आधार कार्ड बना रहा था। कार्रवाई में 10 लोगों को गिरफ्तार किया गया है।
गिरोह के सदस्य जन सेवा केंद्रों पर विधिवत नौकरी करते थे और वहां से आधार पंजीकरण की प्रक्रिया की जानकारी हासिल कर लेते थे। बाद में अधिकृत उपयोगकर्ताओं की आईडी-पासवर्ड, अंगूठे के निशान और आईरिस स्कैन की तस्वीरें गैरकानूनी तरीके से जुटाकर फर्जी आधार कार्ड बनाए जाते थे।
दलालों के जरिए यह आधार कार्ड उन लोगों को दिलाए जाते थे, जिनके पास भारतीय दस्तावेज नहीं थे या जिन्हें अपनी जन्मतिथि और अन्य रिकॉर्ड में बदलाव कराना होता था। इसके लिए गिरोह नकली जन्म प्रमाण पत्र, निवास प्रमाण पत्र और शपथ पत्र तैयार करता था।
2000 से 40 हजार रुपये तक वसूली
एडीजी (कानून-व्यवस्था एवं एसटीएफ) अमिताभ यश ने बताया कि हर फर्जी आधार कार्ड बनाने के लिए 2,000 रुपये से लेकर 40,000 रुपये तक वसूले जाते थे। इन कार्डों का इस्तेमाल पासपोर्ट बनवाने, अन्य फर्जी दस्तावेज तैयार करने और सरकारी योजनाओं का लाभ उठाने में किया जाता था।
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नौ राज्यों में फैला नेटवर्क
गिरोह की गतिविधियां उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल, दिल्ली-एनसीआर, राजस्थान, महाराष्ट्र, हरियाणा और उत्तराखंड में फैली हुई थीं। पुलिस ने उनके कब्जे से फिंगरप्रिंट स्कैनर, आईरिस स्कैन उपकरण, नकली मुहरें, पहले से बने आधार कार्ड और कई दस्तावेज जब्त किए हैं।
गिरफ्तार आरोपियों में गिरोह का मास्टरमाइंड भी शामिल है। लखनऊ के गोमतीनगर स्थित एटीएस थाने में मामला दर्ज किया गया है और पूछताछ जारी है।













