Tuesday, September 22, 2026
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Virat Kavi Sammelan Kharora : साहित्य और काव्य की त्रिवेणी से गूंजा खरोरा, विराट कवि सम्मेलन में प्रदेशभर के दिग्गजों ने दी प्रस्तुतियां

Virat Kavi Sammelan Kharora : खरोरा। खरोरा के ग्राम केशला में लोक कला मंच ‘माया के बंधना’ और शुभम वीडियो वर्ल्ड के संयुक्त तत्वावधान में एक भव्य विराट कवि सम्मेलन का आयोजन संपन्न हुआ। इंजीनियर सुरेश बंजारे एवं श्रीमती निर्मला बंजारे ने अपनी सुपुत्री लक्ष्मी बंजारे के जन्मदिन को यादगार बनाने के लिए इस साहित्यिक समागम का आयोजन किया था। कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ के विभिन्न जिलों से आए कवियों और साहित्यकारों ने अपनी लेखनी से समाज के हर पहलू को छुआ और श्रोताओं की खूब वाहवाही बटोरी।

कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती की वंदना और दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। कवि सम्मेलन की कमान पूरन जायसवाल ने संभाली, जबकि अध्यक्षता छत्तीसगढ़ मीडिया एसोसिएशन के धरसीवां विधानसभा अध्यक्ष रोहित वर्मा ने की। मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित कवि मणि शंकर दिवाकर ‘गदगद’ और विशिष्ट अतिथि जितेंद्र कुमार निर्मलकर ‘जीतला’ ने आयोजन की सराहना करते हुए इसे समाज को साहित्य से जोड़ने की एक सकारात्मक पहल बताया।

कवि सम्मेलन के दौरान ग़ज़लों और शेरो-शायरी का दौर चला, जिसमें अशोक दास की ग़ज़लों ने श्रोताओं के दिल को छू लिया। वहीं, ताहिर खान की तीखी शायरी और व्यवस्था पर किए गए कटाक्ष पर दर्शकों ने खूब तालियां बजाईं। बेटियों की प्रगति पर जितेंद्र निर्मलकर ‘जीतला’ द्वारा पढ़ी गई पंक्तियों ने माहौल को भावनात्मक बना दिया। व्यंग्य के दौर में इंजीनियर सुरेश बंजारे ने आज की शिक्षा और राजनीति पर चुटीली रचना पेश कर सबको हंसने पर मजबूर कर दिया।

आयोजन में पलारी, कोसरंगी और बेमेतरा सहित प्रदेश के कई अंचलों से साहित्यकारों ने शिरकत की। डॉ. रामकुमार साहू ‘मयारू’, लेख राम छत्तीसगढ़िया, ईश्वर जोशी और चंद्रहास सेन जैसे कलमकारों ने अपनी कविताओं के माध्यम से छत्तीसगढ़ी संस्कृति और वर्तमान सामाजिक विसंगतियों पर प्रभावी प्रस्तुति दी। राष्ट्रपति सम्मान से पुरस्कृत साहित्यकार डॉ. गोकुल बंजारे की उपस्थिति ने कार्यक्रम की गरिमा को और बढ़ा दिया।

साहित्यकार मणि शंकर दिवाकर ‘गदगद’ ने इस दौरान बताया कि इस तरह के आयोजनों से न केवल स्थानीय प्रतिभाओं को मंच मिलता है, बल्कि भाषा और संस्कृति का संरक्षण भी होता है। उन्होंने छत्तीसगढ़ी साहित्य को एक सूत्र में पिरोने के अपने संकल्प को दोहराया। कार्यक्रम के अंत में आयोजक सुरेश बंजारे ने सभी आगंतुक कवियों और श्रोताओं का आभार व्यक्त किया।

खरोरा क्षेत्र के इतिहास में यह अपनी तरह का अनूठा आयोजन था जहाँ एक जन्मदिन के अवसर पर फिजूलखर्ची के बजाय साहित्यिक चर्चा और काव्य पाठ को प्राथमिकता दी गई। कार्यक्रम के समापन तक दर्शकों की भारी भीड़ जमी रही, जो खरोरा में साहित्य के प्रति बढ़ते रुझान को दर्शाती है।

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