उज्जैन: आज यानी गुरूवार तड़के उज्जैन स्थित विश्वप्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में संपन्न हुई 27 नवंबर 2025 की भस्म आरती का अलौकिक दृश्य भक्तों के मन को गहराई तक छू गया। सुबह 4 बजे शुरू हुई इस दिव्य आरती ने मंदिर परिसर को आध्यात्मिक ऊर्जा और “हर-हर महादेव” के गगनभेदी जयकारों से भर दिया। हजारों श्रद्धालुओं ने आरती के दौरान भगवान महाकाल के दर्शन कर स्वयं को धन्य महसूस किया।
विशेष वैदिक विधियों से सम्पन्न हुआ अभिषेक और शृंगार
गुरूवार की इस आरती को विशेष वैदिक नियमों और प्राचीन परंपराओं के अनुसार सम्पन्न कराया गया। पुजारियों द्वारा शिवलिंग पर जल, पंचामृत और पवित्र भस्म से अभिषेक किया गया। इसके बाद रुद्राष्टक, रुद्रपाठ और शिव तांडव स्तोत्र का उच्चारण पूरे वातावरण में दिव्यता घोल गया। गर्भगृह से प्रसारित आध्यात्मिक तरंगों ने आरती में उपस्थित हर व्यक्ति को गहरे भक्ति भाव से अनुप्राणित किया।
देशभर से पहुंचे भक्त, पहली पंक्ति में बैठने की होड़
महाकाल की भस्म आरती पूरे देश में विशेष महत्व रखती है। इसी कारण मध्य प्रदेश के अलावा महाराष्ट्र, गुजरात, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, दिल्ली और कर्नाटक सहित कई राज्यों से भारी संख्या में श्रद्धालु उज्जैन पहुंचे। कई भक्त सोमवार रात से ही कतार में लग गए ताकि वे पहली पंक्ति में बैठकर आरती का साक्षात दर्शन कर सकें।
मंदिर प्रशासन ने सुरक्षा और व्यवस्था के लिए अतिरिक्त कर्मचारियों की तैनाती की, साथ ही दर्शनों को सुचारू रखने के लिए दिशा-निर्देश जारी किए।
ऑनलाइन लाइव प्रसारण से जुड़े लाखों श्रद्धालु
जो भक्त उज्जैन नहीं आ सके, उनके लिए मंदिर की आधिकारिक वेबसाइट और यूट्यूब चैनल पर लाइव प्रसारण की व्यवस्था की गई। लाखों लोगों ने घर बैठे ही महाकाल की भस्म आरती का दर्शन किया। डिजिटल माध्यम के कारण विदेशों में रह रहे भारतीयों ने भी इस पवित्र क्षण का अनुभव किया और भावनात्मक रूप से महाकाल से जुड़े रहे।तकनीक और परंपरा के इस सुंदर संगम ने भस्म आरती को और अधिक ऐतिहासिक बना दिया।











