नई दिल्ली; बॉलीवुड में सर्वाइवल ड्रामा अक्सर कमजोर विजुअल इफेक्ट्स के कारण असर खो देते हैं, लेकिन निर्देशक बिजॉय नांबियार की फिल्म ‘तू या मैं’ इस धारणा को बदलने की कोशिश करती है। सीमित लोकेशन और तनावपूर्ण माहौल के सहारे बनाई गई यह कहानी दर्शकों को शुरुआत से अंत तक बांधे रखती है।
कहानी में रोमांस के साथ खतरे की आहट
फिल्म दो अलग दुनिया से आए सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स—अवनि और मारुति—की उलझी हुई प्रेम कहानी से शुरू होती है। अचानक परिस्थितियां उन्हें शहर से दूर एक सुनसान रिसॉर्ट तक ले जाती हैं, जहां एक खतरनाक हादसा उनकी जिंदगी बदल देता है। पूल में मौजूद विशाल मगरमच्छ के सामने दोनों का सामना सिर्फ डर से नहीं, बल्कि अपने रिश्ते की सच्चाई से भी होता है।
निर्देशन और स्क्रीनप्ले की पकड़
बिजॉय नांबियार ने बारिश, सन्नाटे और सीमित स्पेस का उपयोग कर क्लॉस्ट्रोफोबिक तनाव रचा है। लेखक अभिषेक अरुण बांदेकर की कसी हुई पटकथा हर कुछ मिनट में नया मोड़ देती है, जिससे दर्शकों की उत्सुकता बनी रहती है। फिल्म का ट्रीटमेंट धीमे-धीमे बढ़ते डर पर आधारित है, जो इसे सामान्य थ्रिलर से अलग बनाता है।
अभिनय बना सबसे मजबूत पक्ष
आदर्श गौरव अपने किरदार में पूरी तरह ढले नजर आते हैं और भावनात्मक उतार-चढ़ाव को प्रभावी ढंग से निभाते हैं। वहीं शनाया कपूर ने भी अपेक्षा से बेहतर प्रदर्शन कर कहानी को संतुलन दिया है। सहायक कलाकारों और पालतू डॉग के छोटे लेकिन अहम दृश्य फिल्म को भावनात्मक स्पर्श देते हैं।
Read More : T20 World Cup IND vs PAK : भारत-पाक महामुकाबले से पहले टेंशन में टीम इंडिया! जानें पूरा माजरा
वीएफएक्स और तकनीकी पक्ष
मगरमच्छ से जुड़े दृश्य फिल्म की विश्वसनीयता तय करते हैं, और यहां विजुअल इफेक्ट्स संतोषजनक नजर आते हैं। पानी के भीतर की हलचल और खतरे का एहसास दर्शकों में वास्तविक डर पैदा करता है, जो सर्वाइवल जॉनर की सबसे बड़ी जरूरत है।
देखें या नहीं?
अगर आप थ्रिल, तनाव और अलग तरह की प्रेम कहानी पसंद करते हैं, तो ‘तू या मैं’ थिएटर में देखने लायक अनुभव दे सकती है। कुछ जगह सिनेमाई छूट जरूर महसूस होती है, लेकिन कुल मिलाकर फिल्म मनोरंजन और रोमांच का संतुलित पैकेज पेश करती है।











