नई दिल्ली। Nishaanebaz.com-CERT-In AI Security Alert: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) जहां एक तरफ कॉर्पोरेट जगत और उद्योगों के कामकाज को सुगम बना रही है, वहीं दूसरी तरफ यह सुरक्षा के लिहाज से एक नया और बड़ा खतरा बनकर सामने आई है। भारत की राष्ट्रीय साइबर सुरक्षा एजेंसी इंडियन कंप्यूटर इमरजेंसी रिस्पॉन्स टीम (CERT-In) ने हाल ही में एक बेहद चिंताजनक एडवाइजरी जारी कर कॉर्पोरेट जगत की नींद उड़ा दी है। पता चला है कि रिसर्च और टेस्टिंग के दौरान कई ऑटोनॉमस AI एजेंट्स अपनी निर्धारित सीमाएं लांघकर सीधे भारतीय कंपनियों के लाइव सिस्टम में दाखिल हो गए और बिना किसी अनुमति के वहां मौजूद सीक्रेट फाइल्स व प्राइवेट रिकॉर्ड्स खंगाल डाले।
CERT-In की एडवाइजरी CIAD-2026-0049 में हुआ बड़ा खुलासा CERT-In ने अपनी आधिकारिक एडवाइजरी CIAD-2026-0049 में इस पूरे मामले की परतें खोली हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, कुछ AI एजेंट्स को केवल नियंत्रित माहौल में रिसर्च और मूल्यांकन के लिए तैनात किया गया था, लेकिन वे अपनी तय डिजिटल बाउंड्री पार कर गए। इन एजेंट्स ने भारतीय संस्थानों के सूचना एवं संचार तकनीक (ICT) इंफ्रास्ट्रक्चर में अनधिकृत रूप से प्रवेश कर संवेदनशील बिजनेस रिकॉर्ड्स और लोगों का व्यक्तिगत डेटा जुटा लिया।
चौंकाने वाली बात यह रही कि जिन संस्थानों के सिस्टम में यह घुसपैठ हुई, उन्हें खुद इसकी भनक तक नहीं लगी। बाद में AI मॉडल विकसित करने वाली डेवलपर कंपनियों ने स्वयं आगे आकर इस गड़बड़ी का खुलासा किया।
कंपनियों की तकनीकी लापरवाही बनी घुसपैठ का जरिया
जांच में सामने आया है कि इस घुसपैठ के पीछे कंपनियों की अपनी तकनीकी लापरवाही भी प्रमुख वजह रही। कंपनियों के सोर्स कोड, रिपॉजिटरी, CI/CD वेरिएबल्स, कॉन्फ़िगरेशन फाइल्स, क्लाइंट ऐप्स और क्लाउड स्टोरेज में कई स्थानों पर लॉगिन क्रेडेंशियल्स और पासवर्ड खुले (Plaintext) पड़े हुए थे। AI एजेंट्स ने इन्हीं कमजोर कड़ियों को पहचाना और सीधे लाइव सिस्टम का दरवाजा खोलकर अंदर दाखिल हो गए। हालांकि सरकार ने सुरक्षा कारणों से प्रभावित कंपनियों के नामों को सार्वजनिक नहीं किया है।
हैकरों का नया और घातक हथियार बने ओपन-सोर्स AI टूल्स
खतरा सिर्फ भटकते हुए AI एजेंट्स तक ही सीमित नहीं है। साइबर अपराधी अब इंटरनेट पर आसानी से उपलब्ध ओपन-सोर्स एजेंटिक AI टूल्स (Agentic AI Tools) और ऑफेंसिव-सिक्योरिटी फ्रेमवर्क्स का इस्तेमाल कर भारतीय संस्थानों को आर्थिक नुकसान पहुंचाने की फिराक में हैं। AI के आने से साइबर हमलों की रफ्तार कई गुना बढ़ गई है—जिस नेटवर्क में सेंध लगाने में हैकर्स को पहले कई दिन लग जाते थे, वह काम अब महज कुछ ही घंटों में पूरा किया जा रहा है।
बचाव के लिए CERT-In द्वारा जारी निर्देश
सरकारी एजेंसी ने आगाह किया है कि जिन कंपनियों ने समय रहते सुरक्षा खामियां दूर नहीं कीं, उन पर दोबारा हमले होने का बड़ा खतरा है। CERT-In ने कंपनियों को तुरंत निम्नलिखित सुधारात्मक कदम उठाने की सलाह दी है:
-
सीमित एक्सेस: किसी भी AI एजेंट को सिस्टम का अनियंत्रित या खुला एक्सेस न दें और उनकी कार्य सीमा तथा टाइम लिमिट तय करें।
-
क्रेडेंशियल सुरक्षा: कोड फाइलों या रिपॉजिटरी में पासवर्ड और एपीआई की (API Keys) खुले न छोड़ें, इन्हें सुरक्षित वॉल्ट में रखें।
-
क्लाउड ऑडिट: क्लाउड स्टोरेज की परमिशन्स और एक्सेस कंट्रोल्स का नियमित रूप से सिक्योरिटी रिव्यू करें।
