निशानेबाज न्यूज़ डेस्क : सुप्रीम कोर्ट में मध्य प्रदेश के ओबीसी आरक्षण से जुड़े महत्वपूर्ण मामले पर बीते बुधवार सुनवाई हुई, जिसमें अदालत ने राज्य सरकार से कई अहम सवाल पूछे। सुनवाई के दौरान यह मुद्दा प्रमुख रहा कि छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश के आरक्षण मामलों में वास्तविक समानता क्या है और किन आधारों पर मामलों को ट्रांसफर कराया गया।
एमपी और छत्तीसगढ़ मामलों की तुलना पर सवाल
सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता रामेश्वर सिंह ठाकुर ने दलील दी कि दोनों राज्यों की परिस्थितियां अलग हैं। उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़ में अनुसूचित जनजाति (ST) आरक्षण बढ़ाने का मामला है, जबकि मध्य प्रदेश में ओबीसी आरक्षण को 14% से बढ़ाकर 27% करने की संवैधानिक वैधता अब तक हाईकोर्ट द्वारा अंतिम रूप से तय नहीं की गई है।
होल्ड किए गए पदों पर उठा विवाद
अदालत में यह भी तर्क रखा गया कि मध्य प्रदेश सरकार नियमों के विरुद्ध 13% ओबीसी और 13% सामान्य वर्ग के पदों को होल्ड कर रही है। इस मुद्दे पर पहले हाईकोर्ट अंतरिम आदेश दे चुका है, जिसके बाद अब सुप्रीम कोर्ट में आगे की कार्यवाही जारी है।
19 फरवरी को होगी अहम बहस
मामले से संबंधित अंतरिम आवेदन (IA) पर वरीयता क्रम में सुनवाई तय की गई है। विशेष रूप से ओबीसी के 13% पदों को अनहोल्ड करने के प्रश्न पर 19 फरवरी को विस्तृत बहस होगी, जिसे भर्ती प्रक्रियाओं और आरक्षण व्यवस्था के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
भर्ती और सामाजिक संतुलन पर असर संभव
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि सुप्रीम कोर्ट का आगामी निर्णय सरकारी भर्तियों, आरक्षण नीति और सामाजिक प्रतिनिधित्व पर व्यापक प्रभाव डाल सकता है। फिलहाल सभी पक्षों की निगाहें अगली सुनवाई पर टिकी हैं, जहां से इस लंबे समय से चले आ रहे विवाद को नई दिशा मिल सकती है।













