जबलपुर। Nishaanebaz.com-Jabalpur-High-Court-Contempt: मध्य प्रदेश के जबलपुर से प्रशासनिक लापरवाही और गैर-जिम्मेदाराना आचरण का एक बेहद हैरान करने वाला मामला सामने आया है। न्याय के मंदिर और न्यायिक मर्यादाओं को ताक पर रखते हुए टाउन एंड कंट्री प्लानिंग (TNCP) के एक जिम्मेदार अधिकारी ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के दौरान ऐसी हरकत कर दी कि उच्च न्यायालय को भी कड़ी नाराजगी जतानी पड़ी। अदालत की गरिमा को दरकिनार कर वर्चुअल सुनवाई में जुड़े अधिकारी बिना पैंट के ही कैमरे के सामने आ गए, जिसके बाद अब उन्हें आपराधिक अवमानना (क्रिमिनल कंटेप्ट) की कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा।
पूरा मामला यह है कि टीएनसीपी के ज्वाइंट डायरेक्टर अमित गजभिए के खिलाफ न्यायालय की अवमानना से जुड़ा एक मामला विचाराधीन है। इसी सिलसिले में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में महत्वपूर्ण सुनवाई तय की गई थी। अदालत ने संबंधित अधिकारी को व्यक्तिगत रूप से अदालत में हाजिर रहने के निर्देश दिए थे, या फिर तकनीकी सुविधा के तहत वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जुड़ने की छूट प्रदान की थी।
जब नियत समय पर उच्च न्यायालय में इस मामले की सुनवाई शुरू हुई, तो ज्वाइंट डायरेक्टर अमित गजभिए घर पर बैठे-बैठे ही वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जुड़ गए। हैरानी की बात यह रही कि वे कैमरे के सामने बिना पैंट के ही खड़े हो गए और लाइव सुनवाई के दौरान ही अपनी शर्ट के बटन लगाते हुए नजर आए। न्यायिक प्रक्रिया के प्रति अधिकारी का यह लापरवाह रवैया देख अदालत ने इस पर गहरी और कड़ी नाराजगी व्यक्त की, तथा अधिकारी के खिलाफ क्रिमिनल कंटेप्ट का नोटिस जारी करने के निर्देश दिए।
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बता दें कि यह पूरा कानूनी विवाद मूल रूप से मास्टर प्लान में हो रही लंबी देरी से जुड़ा हुआ है। बिल्डर एसोसिएशन की ओर से इस मामले में हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई थी, जिसमें आरोप लगाया गया था कि अदालत के बार-बार कहने के बावजूद टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग द्वारा समय पर मास्टर प्लान जारी नहीं किया जा रहा है। इससे पहले भी इस मामले में अदालत द्वारा प्रमुख सचिव और डायरेक्टर टाउन एंड कंट्री प्लानिंग को शपथ पत्र के जरिए जवाब पेश करने के कड़े निर्देश दिए जा चुके हैं, और पूर्व में भी अदालत इस मामले में अवमानना नोटिस जारी कर चुकी है।
अदालत की कार्यवाही के दौरान घटी इस अप्रत्याशित घटना के बाद मामले की गंभीरता को भांपते हुए डिप्टी एडवोकेट जनरल ने उच्च न्यायालय को यह आश्वासन दिया है कि उच्च स्तर पर बात कर संबंधित अधिकारी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। इसके साथ ही महाधिवक्ता कार्यालय की ओर से इस मामले में कोर्ट से चार सप्ताह का समय मांगा गया है। बहरहाल, इस घटना ने एक बार फिर वर्चुअल सुनवाई के दौरान प्रशासनिक अधिकारियों के अनुशासन और आचरण पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।