जगदलपुर/रायपुर। Nishaanebaz.com-Jhiram Ghati Massacre NIA Court Verdict 2026: छत्तीसगढ़ के इतिहास और भारतीय राजनीति के सबसे खौफनाक व दर्दनाक पन्नों में दर्ज झीरम घाटी हत्याकांड (Jhiram Ghati Massacre) मामले में 13 साल बाद ऐतिहासिक फैसला आया है। जगदलपुर स्थित विशेष एनआईए (NIA) कोर्ट ने मामले में सुनवाई पूरी करते हुए सभी 10 आरोपी नक्सलियों को दोषी करार दिया है। अदालत 16 सितंबर 2026 को सभी दोषियों की सजा का ऐलान करेगी। इस संगीन अपराध के लिए कानून में फांसी से लेकर उम्रकैद तक का कड़ा प्रावधान है। हालांकि, कोर्ट के इस फैसले पर कांग्रेस ने असंतोष जाहिर करते हुए आरोप लगाया है कि केवल छोटे कैडर के नक्सलियों को सजा दिलाई जा रही है, जबकि साजिश रचने वाले मुख्य मास्टरमाइंड और असली गुनहगार अब भी पुलिस की पहुंच से बाहर हैं।
झीलम घाटी नक्सली हमले पर आए कोर्ट के फैसले के बाद PCC चीफ दीपक बैज ने उठाया बड़ा सवाल…#JeeramGhati #DeepakBaij #CGCongress #CGNews #RaipurNews pic.twitter.com/hrPv9oIcVe
— Nishaanebaz.com (@nishaanebaz_com) September 5, 2026
यह पूरा घटनाक्रम साल 2013 का है, जब छत्तीसगढ़ में विधानसभा चुनाव की सरगर्मियां तेज थीं और 10 साल से सत्ता में काबिज तत्कालीन रमन सिंह सरकार को घेरने के लिए कांग्रेस जमीन पर पूरा जोर लगा रही थी। इसी चुनावी रणनीति के तहत 25 मई 2013 को बस्तर के सुकमा में कांग्रेस की ओर से एक विशाल ‘परिवर्तन रैली’ का आयोजन किया गया था। रैली बेहद सफल रही और शाम के वक्त कांग्रेस का काफिला, जिसमें करीब 25 गाड़ियां और 20 से अधिक शीर्ष नेता सवार थे, जगदलपुर की ओर लौट रहा था। बस्तर के जंगलों में उस वक्त छत्तीसगढ़ कांग्रेस की पूरी टॉप लीडरशिप मौजूद थी।
शाम करीब 4 बजे जब यह काफिला सुकमा-जगदलपुर मार्ग पर स्थित झीरम घाटी के सघन इलाके से गुजर रहा था, तब करीब 200 से अधिक हथियारबंद नक्सलियों ने पहले से घात लगाकर (Ambush) अचानक अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी। अचानक हुए इस भीषण हमले में नेताओं और सुरक्षाकर्मियों को संभलने का मौका तक नहीं मिला। लगभग दो घंटे से अधिक समय तक गोलियों की तड़तड़ाहट से पूरी घाटी गूंजती रही। इस हमले में तत्कालीन प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष नंदकुमार पटेल, उनके बेटे दिनेश पटेल सहित अनेक वरिष्ठ नेता मौके पर ही शहीद हो गए।
गोलियों की बौछार रोकने के बाद शाम करीब 5 बजे नक्सली पहाड़ियों से नीचे सड़क पर उतरे और गाड़ियों में एक-एक कर जीवित बचे लोगों की पहचान की। इसके बाद नक्सलियों ने जिस बर्बरता का परिचय दिया, उसने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया। हमलावरों ने घायल नेताओं पर दोबारा गोलियां चलाईं और चाकुओं से गोद डाला। जांच के दौरान कई शवों पर 100 से अधिक चाकू के निशान मिले थे। इस निर्मम हमले में कुल 31 लोगों की जान गई थी, जिसमें तत्कालीन पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी को छोड़कर राज्य कांग्रेस की पूरी अग्रिम पंक्ति का सफाया हो गया था।
नक्सलियों के इस सुनियोजित हमले का मुख्य निशाना बस्तर में नक्सलियों के खिलाफ ‘सलवा जुडूम’ जन-आंदोलन की अगुवाई करने वाले कद्दावर नेता महेंद्र कर्मा थे। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में खुलासा हुआ था कि महेंद्र कर्मा के शरीर को छलनी करते हुए 100 से ज्यादा गोलियां दागी गई थीं और 50 से अधिक बार चाकू से वार किया गया था। हत्याकांड के 13 साल बाद आए एनआईए कोर्ट के फैसले में 11 में से 10 आरोपियों को दोषी ठहराया गया है, जबकि एक आरोपी की सुनवाई के दौरान मौत हो चुकी है। केस में 101 गवाहों के बयान दर्ज किए गए थे। हालांकि, पीड़ित परिवारों और नेताओं का कहना है कि षड्यंत्रकारियों के बेनकाब होने तक न्याय अधूरा ही रहेगा।






