Singrauli News: सिंगरौली। जिले में विकास कार्यों के नाम पर कथित भ्रष्टाचार और प्रशासनिक लापरवाही का एक गंभीर मामला सामने आया है। लगातार शिकायतों और खबरों के प्रकाशन के बावजूद जिम्मेदार अधिकारियों की चुप्पी अब कई सवाल खड़े कर रही है। ग्रामीणों का आरोप है कि विभागीय उदासीनता अनियमितताओं को खुला संरक्षण देने का संकेत दे रही है। जानकारी के अनुसार बैढ़न वन रेंज के अमिलिया उत्तरी क्षेत्र में कक्ष क्रमांक 387 और 388 की वन भूमि पर लोक निर्माण विभाग द्वारा सड़क निर्माण कराया जा रहा था। यह कार्य ग्राम पंचायत सुहिरा रामानुज चक्की से गुजरी खोली तक सड़क निर्माण के लिए समय इंटरप्राइजेज को टेंडर के माध्यम से सौंपा गया था। ग्रामीणों का आरोप है कि स्वीकृत स्थल पर निर्माण करने के बजाय सड़क को सीधे जंगल के भीतर आगे बढ़ा दिया गया, जिससे वन कानूनों के उल्लंघन की आशंका गहरा गई है।
Singrauli News: रातों-रात कट गए पेड़, इमारती लकड़ी भी गायब
स्थानीय लोगों के अनुसार सड़क निर्माण के दौरान सैकड़ों हरे-भरे पेड़ों की कटाई कर दी गई। सबसे गंभीर बात यह है कि कटे हुए पेड़ों की लकड़ी मौके से गायब पाई गई, जिससे अवैध लकड़ी तस्करी और विभागीय मिलीभगत के आरोप तेज हो गए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि बिना वन विभाग मध्य प्रदेश की अनुमति इस तरह जंगल में निर्माण संभव ही नहीं है।
मशीनें जब्त, लेकिन कार्रवाई अधूरी
सूचना मिलने पर वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और एक जेसीबी व ट्रैक्टर जब्त किए गए, लेकिन इसके बाद भी न तो ठेकेदार पर ठोस कार्रवाई हुई और न ही निर्माण कार्य पर पूर्ण रोक लगी, जिससे लोगों में आक्रोश है। ग्रामीणों का यह भी आरोप है कि जंगल क्षेत्र की नदी से सैकड़ों ट्रैक्टर बालू का अवैध उत्खनन किया गया, लेकिन संबंधित विभागों की चुप्पी संदेह को और गहरा रही है।
2–3 करोड़ की सड़क पर घोटाले के आरोप
जानकारों के मुताबिक इस सड़क परियोजना की लागत करीब 2 से 3 करोड़ रुपए बताई जा रही है। तय स्थान छोड़कर जंगल के भीतर सड़क निर्माण को सरकारी धन के दुरुपयोग और संभावित घोटाले से जोड़कर देखा जा रहा है।
अधिकारियों के बयान
पीडब्ल्यूडी इंजीनियर संजय श्रीवास्तव ने कहा कि यदि ठेकेदार द्वारा कोई गड़बड़ी की गई है तो कार्रवाई उसी पर होगी और सड़क वहीं बनाई जाएगी जहां टेंडर स्वीकृत है।
वहीं वन मंडलाधिकारी अखिल बंसल ने बताया कि मामले की जानकारी आने के बाद काम बंद करा दिया गया है लेकिन हम पुनः एक बार जानकारी लेकर आप को स्थिति स्पष्ट करते है।
ग्रामीणों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि यदि जल्द प्रशासन ने ठोस कदम नहीं उठाए तो आंदोलन का रास्ता अपनाया जाएगा।













