नई दिल्ली :कांग्रेस सांसद शशि थरूर एक बार फिर अपने बयान को लेकर सुर्खियों में हैं। इस बार उन्होंने बीजेपी के वरिष्ठ नेता और पूर्व उपप्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी की राजनीतिक विरासत का खुलकर समर्थन किया है। उन्होंने आडवाणी के 98वें जन्मदिन पर बधाई देते हुए थरूर ने उन्हें “सच्चा राजनेता” बताया और कहा कि उनकी विनम्रता, ईमानदारी और लोकसेवा के प्रति समर्पण अविस्मरणीय है।
इस बाबत थरूर ने लिखा— “आडवाणी जी का दशकों लंबा सार्वजनिक जीवन किसी एक घटना तक सीमित नहीं किया जा सकता। जैसे नेहरूजी का योगदान सिर्फ 1962 की हार तक सीमित नहीं है और न ही इंदिरा गांधी की विरासत को सिर्फ आपातकाल के आधार पर परिभाषित किया जा सकता है, ठीक वैसे ही आडवाणी जी की भूमिका को एक प्रसंग में बांधना अनुचित है।”
सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाएँ
आडवाणी की प्रशंसा करते ही थरूर सोशल मीडिया पर आलोचना के घेरे में आ गए। कई विरोधियों ने उन पर आरोप लगाया कि वह आडवाणी की “विभाजनकारी राजनीति” को हल्का दिखाने की कोशिश कर रहे हैं।
सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता संजय हेगड़े ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा— “इस देश में नफरत के बीज बोना लोकसेवा नहीं है।” हालाँकि थरूर अपने रुख पर कायम रहे। उन्होंने कहा कि एक नेता के पूरे जीवन मूल्यांकन के लिए संतुलित दृष्टिकोण जरूरी है।
थरूर की टिप्पणी और कांग्रेस में हलचल
थरूर का बयान ऐसे समय आया है जब वह पहले भी अपनी बेबाक टिप्पणियों से चर्चा में रहे हैं। हाल ही में उन्होंने अंतरराष्ट्रीय लेख में वंशवाद पर भी चोट की थी।
हाल ही में अपने लेख में उन्होंने लिखा था— “भारतीय राजनीति परिवारों की निजी जायदाद नहीं है। वंशवादी राजनीति लोकतंत्र के लिए खतरा है।” यह टिप्पणी कांग्रेस के भीतर भी हलचल पैदा कर गई थी, क्योंकि पार्टी लंबे समय से नेहरू-गांधी परिवार के नेतृत्व के इर्द-गिर्द केंद्रित रही है।
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राजनीतिक गलियारों में चल रही नई बहस
थरूर के आडवाणी संबंधी बयान ने राजनीतिक हलकों में नई बहस छेड़ दी है। कुछ लोग इसे “परिपक्व राजनैतिक विश्लेषण” बता रहे हैं, जबकि विरोधी इसे “ग़लत समय पर कही गई अप्रत्याशित प्रशंसा” कह रहे हैं।कुल मिलाकर, थरूर के बयान ने कांग्रेस और बीजेपी दोनों खेमों में चर्चाओं को फिर तेज कर दिया है।











