Monday, September 28, 2026
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Shajapur SDM Building Corruption : शाजापुर: ‘भ्रष्टाचार’ की नींव पर खड़ा हुआ एसडीएम का नया आशियाना! भोपाल की टीम ने पकड़ी गड़बड़ियां, स्थानीय अफसरों ने क्यों मूंदी आंखें?

Shajapur SDM Building Corruption : गुलाना/शाजापुर (किशोर नाथ राजगुरु)। सरकारी निर्माण कार्यों में बंदरबांट और ‘सांठगांठ’ का एक बड़ा खेल शाजापुर जिले के गुलाना में सामने आया है। जिस भवन में बैठकर प्रशासन को क्षेत्र की कानून और व्यवस्था संभालनी है, उसी नवनिर्मित एसडीएम (SDM) कार्यालय की दीवारों में घटिया निर्माण और भ्रष्टाचार की दरारें साफ नजर आ रही हैं। हैरानी की बात यह है कि जो खामियां भोपाल की टीम को चंद मिनटों में दिख गईं, वे जिले के जिम्मेदार इंजीनियरों को महीनों तक नजर नहीं आईं।

भोपाल से आई टीम ने खोली पोल

राजधानी भोपाल से आई राजस्व आयुक्त की विशेष टीम ने जब गुलाना स्थित इस नवनिर्मित भवन का औचक निरीक्षण किया, तो वहां निर्माण की गुणवत्ता देखकर टीम के अधिकारी दंग रह गए।

  • तकनीकी खामियां: बिल्डिंग के स्ट्रक्चर और फिनिशिंग में भारी लापरवाही मिली।

  • घटिया सामग्री: निर्माण में मानक स्तर की सामग्री के बजाय दोयम दर्जे की ईंटों, रेत और सीमेंट के उपयोग के पुख्ता संकेत मिले।

  • अनदेखी का सवाल: सवाल यह है कि जब ठेकेदार दिन-रात काम कर पूरी बिल्डिंग तान रहा था, तब शाजापुर पीडब्ल्यूडी और संबंधित विभाग के इंजीनियर कहाँ सो रहे थे?

कार्रवाई के डर से दूसरे दिन दौड़े जिले के अफसर

भोपाल की टीम के सख्त तेवरों ने शाजापुर के प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मचा दिया है। कार्रवाई की तलवार लटकती देख अगले ही दिन कार्यपालन यंत्री (EE) सहित इंजीनियरों और अधिकारियों का लाव-लश्कर मौके पर पहुँचा। कल तक जो अधिकारी दफ्तरों में बैठकर ‘सब ठीक है’ का दावा कर रहे थे, वे अब बिल्डिंग के कोने-कोने की बारीकी से जांच करते दिखे।

ठेकेदार को संरक्षण या अधिकारियों की सुस्ती?

क्षेत्र में चर्चा है कि ठेकेदार ने बिना किसी तकनीकी देखरेख और रोक-टोक के मनमाने ढंग से काम निपटा दिया। नियमानुसार हर चरण (फाउंडेशन, लिंटल, स्लैब) पर गुणवत्ता जांच अनिवार्य है, लेकिन इस मामले में ऐसा प्रतीत होता है कि अधिकारियों ने ठेकेदार को खुली छूट दे रखी थी।

क्या होगी ‘ब्लैकलिस्ट’ की कार्रवाई?

अब जनता की नजरें कलेक्टर और वरिष्ठ अधिकारियों पर टिकी हैं। सवाल खड़े हो रहे हैं:

  1. क्या दोषी ठेकेदार को ब्लैकलिस्ट किया जाएगा या भारी जुर्माना लगेगा?

  2. क्या उन इंजीनियरों पर गाज गिरेगी जिन्होंने घटिया निर्माण को अपनी आंखों के सामने होने दिया?

  3. क्या इस सरकारी धन की बर्बादी की रिकवरी संबंधितों से की जाएगी?

पड़ताल जारी है: सरकारी पैसे की इस बंदरबांट और घटिया निर्माण की हर परत खोलने के लिए हमारे साथ बने रहें। हम कलेक्टर शाजापुर और संबंधित विभाग के प्रमुख से इस मामले में ठोस जवाब की प्रतीक्षा कर रहे हैं।

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