Sexual Harassment : नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने ओडिशा के बालासोर ज़िले की एक छात्रा द्वारा आत्मदाह के मामले में गहरा खेद जताया है। यह छात्रा फकीर मोहन ऑटोनॉमस कॉलेज में बी.एड की पढ़ाई कर रही थी। उसने अपने एचओडी पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया था, लेकिन कॉलेज प्रशासन की निष्क्रियता के कारण वह मजबूरन आत्मदाह करने को बाध्य हुई। बाद में इलाज के दौरान एम्स भुवनेश्वर में उसकी मृत्यु हो गई।
सुप्रीम कोर्ट की बेंच, जिसमें न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची शामिल थे, ने इस घटना को “शर्मनाक और दुर्भाग्यपूर्ण” बताया और कहा कि “हम शर्मिंदा हैं कि आज भी ऐसी घटनाएं हो रही हैं।” कोर्ट ने यह भी कहा कि यह कोई विरोधात्मक मुकदमा नहीं है, बल्कि एक संस्थागत असफलता का मामला है।
महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए सुप्रीम कोर्ट के सुझाव
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार और सभी संबंधित पक्षों से यह सुझाव मांगे कि कैसे स्कूली छात्राओं, गृहणियों और ग्रामीण क्षेत्रों की बच्चियों को सशक्त बनाया जा सकता है। अदालत का कहना था कि इसके लिए ठोस कदम उठाए जाने चाहिए, ताकि निर्देशों का वास्तविक प्रभाव दिखे।
वरिष्ठ वकील ने कहा — यह संस्थागत हत्या है
वरिष्ठ अधिवक्ता महालक्ष्मी पावनी ने कोर्ट को बताया कि छात्रा ने हेल्पलाइन पर कॉल की थी, लेकिन उसे कोई मदद नहीं मिली। उन्होंने इसे “संस्थागत हत्या” बताया, क्योंकि सिस्टम ने उसकी शिकायत पर कोई संज्ञान नहीं लिया। उन्होंने यह भी कहा कि देश में ऑनलाइन शिकायत प्रक्रियाओं को लेकर जागरूकता की भारी कमी है।
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यौन अपराधियों का नेशनल डेटाबेस — लेकिन क्या यह काफी है?
एडिशनल सॉलिसिटर जनरल (ASG) ने अदालत को बताया कि देश में यौन अपराधियों का नेशनल डेटाबेस बनाया गया है। लेकिन पावनी ने इस पर सवाल उठाते हुए कहा कि अगर यह डेटा सार्वजनिक होता, तो कोलकाता लॉ कॉलेज के रेप केस में आरोपी को कॉलेज में भर्ती ही नहीं किया जाता। उस आरोपी के खिलाफ पहले से 11 शिकायतें थीं।
पुलिस स्टेशनों और सुरक्षा ढांचे की कमी पर चिंता
याचिका में यह भी बताया गया कि देश में कुल 17,563 पुलिस स्टेशन हैं, जिनमें से सिर्फ 3,256 विशेष रूप से महिला मामलों के लिए हैं। रेलवे स्टेशनों की संख्या लगभग 7,863 है, लेकिन उनमें से केवल 800 स्टेशनों में सीसीटीवी कैमरे लगे हैं। विशेष रूप से ग्रामीण इलाकों में महिलाएं बेहद असुरक्षित महसूस करती हैं।
सुप्रीम कोर्ट की पहल
न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने कहा कि नेशनल लीगल सर्विस अथॉरिटी (NALSA) महिलाओं को सशक्त करने के लिए और भी योजनाएं ला रही है। लेकिन यह ज़रूरी है कि जब महिलाएं हेल्पलाइन पर कॉल करें, तो उन्हें वास्तविक मदद मिले, ना कि नैतिक शिक्षा या टालमटोल।











